उदित वाणी, कोलकाता : पश्चिम बंगाल में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों के नतीजे 4 मई को घोषित होने के बाद से अब तक पोस्ट-पोल हिंसा की घटनाओं के संबंध में कुल 200 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 433 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सिद्ध नाथ गुप्ता ने बुधवार को यह जानकारी दी.
डीजीपी ने बताया कि चुनाव के बाद हुई हिंसा के मामलों में सीधे तौर पर शामिल होने के आरोप में की गई 433 गिरफ्तारियों के अलावा, अब तक 1,100 लोगों को एहतियाती हिरासत में रखा गया है.
डीजीपी का यह बयान, भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के उस निर्देश के एक दिन बाद आया है, जिसमें आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और राज्य में तैनात सीएपीएफ को चुनाव के बाद होने वाली हिंसा के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ (बिल्कुल भी बर्दाश्त न करने) की नीति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था.
उन्होंने निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी के लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी के आवासों और कार्यालयों के बाहर से कुछ सुरक्षा व्यवस्था हटाए जाने के बारे में भी बताया.
डीजीपी ने कहा, “अपनी मौजूदा पदों की वजह से प्रोटोकॉल के अनुसार, ये दोनों ही विशिष्ट सुरक्षा व्यवस्था के हकदार हैं, जो उन्हें अभी भी दी जा रही है. हालांकि, कुछ अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्थाएं, जिनका लाभ वे पहले उठा रहे थे, अब हटा ली गई हैं और उन सुरक्षाकर्मियों का इस्तेमाल इस समय राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया जा रहा है.”
मीडियाकर्मियों के जरिए डीजीपी ने जनता से यह भी अपील की कि वे किसी भी हाल में कानून को अपने हाथ में न लें. उन्होंने कहा, “हो सकता है कि कुछ लोगों को दूसरों से कोई शिकायत हो. ऐसे मामलों में उन्हें कानून को अपने हाथ में लेने के बजाय पुलिस से संपर्क करना चाहिए. अगर कोई घटना होती है और कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की जाती है, तो पुलिस जहां भी जरूरी होगा, खुद ही मामले दर्ज करेगी.”
ईसीआई के निर्देशों के अनुसार, चुनाव के बाद होने वाली हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए, 4 मई के बाद भी पश्चिम बंगाल में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की 500 कंपनियां तैनात हैं. ये बल आयोग से अगले आदेश मिलने तक राज्य में तैनात रहेंगे.
(आईएएनएस)


