उदित वाणी, कोलकाता: पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल भाटपाड़ा विधानसभा सीट पर भाजपा ने एक बार फिर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। उत्तर 24 परगना जिले की इस अहम सीट पर भाजपा उम्मीदवार पवन कुमार सिंह ने जीत की हैट्रिक लगाते हुए टीएमसी को बड़े अंतर से हराया है।
पवन कुमार सिंह ने 22,807 वोटों से दर्ज की जीत
चुनाव आयोग (ECI) के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा प्रत्याशी पवन कुमार सिंह को कुल 61,683 वोट मिले। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी टीएमसी के अमित गुप्ता को 22,807 वोटों के अंतर से पराजित किया, जिन्हें 38,876 वोट प्राप्त हुए। इस जीत के साथ ही भाटपाड़ा एक बार फिर राज्य की सबसे चर्चित सीटों की सूची में शीर्ष पर आ गया है।
भाटपाड़ा का भौगोलिक और राजनीतिक भूगोल
भाटपाड़ा बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली एक सामान्य विधानसभा सीट है। यह पूरी तरह से शहरी क्षेत्र है जिसमें भाटपाड़ा नगरपालिका के वार्ड 1 से 17 शामिल हैं। हुगली नदी के पूर्वी किनारे पर बसा यह इलाका कोलकाता मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
गढ़ से बदलाव तक: दिलचस्प रहा है इतिहास
भाटपाड़ा का राजनीतिक इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है:
शुरुआती दौर: पहले पांच दशकों तक यहां कांग्रेस और वामपंथी दलों का दबदबा रहा, जहां दोनों ने 6-6 बार जीत दर्ज की।
टीएमसी का उदय: 2001 से 2016 के बीच अर्जुन सिंह ने लगातार चार चुनाव जीतकर इसे टीएमसी का अभेद्य किला बना दिया।
भाजपा का वर्चस्व: 2019 में अर्जुन सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद हुए उपचुनाव में उनके बेटे पवन कुमार सिंह ने जीत दर्ज कर सीट भाजपा के खाते में डाली। 2021 के बाद अब फिर उन्होंने अपनी जीत बरकरार रखी है।
जनसांख्यिकी और सामाजिक संरचना
2021 के आंकड़ों के अनुसार, यहां करीब 1.54 लाख मतदाता हैं। जनसांख्यिकीय रूप से यहां लगभग 23.40% मुस्लिम मतदाता हैं, जबकि अनुसूचित जाति (SC) और जनजाति (ST) की आबादी करीब 10% है। हालांकि, आंकड़ों से पता चलता है कि शहरी उदासीनता के कारण यहां वोटिंग प्रतिशत में लगातार गिरावट आ रही है।
संस्कृत विद्वानों की बस्ती से औद्योगिक हब तक
‘भाटपाड़ा’ का नाम संस्कृत विद्वानों की बस्ती ‘भट्टा-पल्ली’ से प्रेरित है। ब्रिटिश काल में यह जूट उद्योग का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा। हालांकि आज कई जूट मिलें बंद हो चुकी हैं, लेकिन यहां की अर्थव्यवस्था अब भी छोटे उद्योगों, व्यापार और सर्विस सेक्टर पर टिकी है। यह क्षेत्र सियालदह-राणाघाट रेलवे लाइन और बैरकपुर ट्रंक रोड के जरिए कोलकाता से बेहतर तरीके से जुड़ा हुआ है।


