उदित वाणी, जमशेदपुर: कदमा के प्रकृति विहार में चल रहे जोहार हाट में विभिन्न जनजातीय समूहों की ओर से प्रदर्शित कलाकृतियों लोगों को लुभा रही है. झारखंड के ट्राइबल हीलरों ने भी जोहार हाट में अपना स्टॉल लगाया है.
इन जनजातीय वैद्यों ने हर्बल समेत पारम्परिक चिकित्सा पद्धति को प्रदर्शित किया है, जो कैंसर से लेकर दमा, डायबिटीज, किडनी, टीबी, जॉन्डिस और त्वचा रोग के इलाज में मददगार है.
हाट में झारखंड के खड़िया जनजातीय समूह ने अपने समृद्ध व्होल ग्रेन को प्रदर्शित किया है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहतर तो है ही, शुद्धता में भी अच्छा है. कुल्थी दाल, रे़ड राइस और अन्य आनाज को प्रदर्शित किया गया है, जो पारम्परिक विधि के साथ आधुनिक कुकिंग स्टाइल में इस्तेमाल हो सकता है.
बांस के लैम्प्स आकर्षण के केन्द्र
हाट में बांस के लैम्प्स भी आकर्षण के केन्द्र बने हुए हैं. संथाल समुदाय बांस के हस्तशिल्प को बनाने में माहिर है, जिसे पश्चिम बंगाल का दरिचा फाउंडेशन प्रोत्साहित कर रहा है. इको फ्रेंडली और सस्टेनेबल यह लैम्प्स खूब बिक रहा है. झारखंड आधारित एक स्टार्ट अप ने घिंचा साड़ी को प्रदर्शित किया है, हैंडलूम के जरिए सिल्क की बनी यह साड़ी महिलाओं का काफी भा रही है.
इसी तरह पश्चिम बंगाल के बोड़ो जनजातीय समूह ने मैट को प्रदर्शित किया है, जिसका शिल्प और नक्काशी हर व्यक्ति को आकर्षित कर रहा है. प्राकृतिक फाइबर रीड्स और ग्रास की बनी यह कलाकृतियां घरों को सजाने के लिए है.
इस आयोजन में इस बार झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को डिस्प्ले किया गया है. 20 मार्च तक चलने वाले यह हाट सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है. उल्लेखनीय है कि टाटा स्टील फाउंडेशन हर माह सप्ताह भर के लिए इस मेले का आयोजन करता है ताकि जनजातीय हस्तशिल्प को प्रोत्साहन मिल सके.



