उदित वाणी, पटमदा: विभागीय निर्देशानुसार एसएस +2 उच्च विद्यालय, पटमदा में मंगलवार को समर कैंप का शानदार आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और रचनात्मक विकास को प्रोत्साहित करना था। समर कैंप में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और अपनी बहुमुखी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया।
योग और फिटनेस गतिविधियों से हुई शुरुआत
कैंप की शुरुआत योग अभ्यास के साथ की गई। विद्यार्थियों ने सूर्य नमस्कार, प्राणायाम और ध्यान (मेडिटेशन) के माध्यम से अपनी मानसिक एकाग्रता को बढ़ाने का अभ्यास किया। योग के पश्चात बच्चों के लिए विभिन्न शारीरिक गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें निम्नलिखित स्पर्धाएं शामिल थीं:
दौड़, पुश-अप, सिट-अप, स्किपिंग, प्लैंक
इन खेलकूद और फिटनेस गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में फिटनेस, अनुशासन और टीम भावना को बढ़ावा मिला।
हस्तशिल्प कार्यशाला रही मुख्य आकर्षण
इस समर कैंप का मुख्य आकर्षण हस्तशिल्प कार्यशाला रही। इसमें विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता का परिचय देते हुए मिट्टी, लकड़ी और कागज की मदद से खूबसूरत खिलौने तैयार किए। इसके अलावा बच्चों ने झारखंड की समृद्ध संस्कृति से जुड़ी पारंपरिक वस्तुओं का भी निर्माण किया। इस गतिविधि से जहां बच्चों की रचनात्मक क्षमता विकसित हुई, वहीं स्थानीय कला और संस्कृति के प्रति उनका जुड़ाव भी बेहद मजबूत हुआ।
बालिकाओं ने मारी बाजी, 113 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
इस समर कैंप में कुल 113 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया, जिसमें 46 बालक और 67 बालिकाएं शामिल थीं। कार्यक्रम में बालिकाओं की सक्रिय और बड़ी भागीदारी विशेष रूप से सराहनीय रही। सभी विद्यार्थियों ने पूरे अनुशासन, आपसी सहयोग और टीम भावना के साथ विभिन्न प्रकार की गतिविधियों में हिस्सा लिया।
इन शिक्षकों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
समर कैंप को पूरी तरह सफल बनाने और इसके बेहतर संचालन में विद्यालय के निम्नलिखित शिक्षकों व कर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:
मिताली बासु, श्रीमंत प्रमाणिक, महेश द्विवेदी, राशीद नेसार, अल्पा रोशनी, अभिजीत पाल, रितिक गुंजन धान
प्राचार्य डॉ. मिथिलेश कुमार का वक्तव्य (राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर जोर)
विद्यालय के प्राचार्य डॉ. मिथिलेश कुमार ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा:“इस प्रकार के समर कैंप विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। योग, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और सांस्कृतिक जुड़ाव विकसित होता है। राष्ट्रीय शिक्षा (NEP 2020) के अनुरूप इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक रूप से ही नहीं, बल्कि जीवन कौशल और स्वस्थ जीवनशैली की दिशा में भी प्रेरित करती हैं।”


