उदित वाणी, चक्रधरपुर : चक्रधरपुर रेल मंडल के परिचालन विभाग में कथित भ्रष्टाचार, घूसखोरी और मनमानी कार्यशैली को लेकर कर्मचारियों ने खुलकर विरोध दर्ज कराया है। विभाग के कर्मचारियों ने डीआरएम को पत्र भेजकर ट्रांसफर-पोस्टिंग, प्रमोशन, छुट्टी स्वीकृति और भत्तों के नाम पर हो रही अवैध वसूली की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत पत्र में कई अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले वर्ष जरूली से 12 ट्रेन मैनेजरों के टाटानगर तबादले के एवज में कथित रूप से एक चारपहिया वाहन की मांग की गई थी। आरोप है कि मांग पूरी होने के बाद ही ट्रांसफर प्रक्रिया को मंजूरी दी गई। वहीं, टाटानगर और आदित्यपुर में 20 प्रतिशत हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) लागू कराने के नाम पर प्रति कर्मचारी पांच हजार रुपये वसूले गए, लेकिन राशि लेने के बावजूद सुविधा शुरू नहीं की गई।
शिकायत में सीनी स्टेशन का भी उल्लेख किया गया है, जहां ट्रांसफर होकर पहुंचे ट्रेन मैनेजरों से रिलीज मेमो जारी करने के बदले स्टेशन मास्टर कक्ष की कुर्सी, फूलों के गमले और केबिन के पर्दे तक उपलब्ध कराने का दबाव बनाने का आरोप लगाया गया है।
कर्मचारियों ने छुट्टी मंजूरी प्रक्रिया में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, पांच दिन से कम अवकाश लेने पर तीन बंडल ए-4 साइज पेपर और पांच दिन से अधिक छुट्टी पर दो हजार रुपये की मांग की जाती है। पैसे या सामान नहीं देने पर कर्मचारियों को अनुपस्थित दिखाने, प्रताड़ित करने और वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष शिकायत भेजने की धमकी दी जाती है।
इसके अलावा विभाग में रेल बिजली के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नियमों की अनदेखी कर आरआरआई केबिन में अक्सर पार्टियों का आयोजन किया जाता है।
पत्र में जातिवाद को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया गया है। कर्मचारियों का दावा है कि कुछ अधिकारी एक ही जाति और क्षेत्र विशेष से जुड़े लोगों को विशेष लाभ पहुंचा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्मचारियों ने मुख्य सतर्कता अधिकारी की निगरानी में उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित कर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।


