
उदित वाणी, जमशेदपुर: कदमा के प्रकृति विहार में चल रहे जोहार हाट में शनिवार को काफी भीड़ रही. मौसम खराब होने के बावजूद लोग हाट में आए. विभिन्न जनजातीय समूहों की ओर से प्रदर्शित कलाकृतियों को लोग काफी पसंद कर रहे हैं.
हाट में आए डॉ.सुनील मुर्मू ने बताया कि एक छत के नीचे जनजातीय कलाकृतियों को पेश किया गया है. जनजातीय वैद्यों ने हर्बल समेत पारम्परिक चिकित्सा पद्धति को प्रदर्शित किया है, जो कैंसर से लेकर दमा, डायबिटीज, किडनी, टीबी, जॉन्डिस और त्वचा रोग के इलाज में कारगर है. बांस के लैम्प्सकाफी अच्छे हैं.
संथाल समुदाय बांस के हस्तशिल्प को बनाने में माहिर है, जिसे पश्चिम बंगाल का दरिचा फाउंडेशन प्रोत्साहित कर रहा है. इको फ्रेंडली और सस्टेनेबल यह लैम्प्स खूब बिक रहा है.
झारखंड आधारित एक स्टार्ट अप ने घिंचा साड़ी को प्रदर्शित किया है, हैंडलूम के जरिए सिल्क की बनी यह साड़ी महिलाओं का काफी भा रही है. इसी तरह पश्चिम बंगाल के बोड़ो जनजातीय समूह ने मैट को प्रदर्शित किया है, जिसका शिल्प और नक्काशी हर व्यक्ति को आकर्षित कर रहा है. प्राकृतिक फाइबर रीड्स और ग्रास की बनी यह कलाकृतियां घरों को सजाने के लिए है.
इस आयोजन में इस बार झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को डिस्प्ले किया गया है. 20 मार्च तक चलने वाले यह हाट सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है.

