उदित वाणी, जमशेदपुर : शहर में ट्रैफिक व्यवस्था संभालने और कानून का पालन कराने वाली जमशेदपुर पुलिस एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। हेलमेट जांच और वाहन चेकिंग के दौरान कथित रिश्वत मांगने के आरोप में दो ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के निलंबन ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि विभाग भ्रष्टाचार के मामलों में सख्ती दिखाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह भी उतना ही बड़ा सच है कि लगातार विभागीय कार्रवाई के बावजूद घूसखोरी और अनुशासनहीनता जैसे आरोप थमने का नाम नहीं ले रहे।
ताजा मामले में 25 मई 2026 को साकची ट्रैफिक थाना में पदस्थापित एएसआई शिवशंकर पासवान और जुगसलाई ट्रैफिक थाना के एएसआई जय कुमार दास को हेलमेट जांच के दौरान कथित रूप से घूस मांगने के आरोप में निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद शहर में ट्रैफिक जांच के नाम पर होने वाली कथित अवैध वसूली को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि, यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले छह वर्षों में जमशेदपुर पुलिस के कई अधिकारी और जवान भ्रष्टाचार, ड्यूटी में लापरवाही, अभद्र व्यवहार, शक्ति के दुरुपयोग और यौन शोषण जैसे गंभीर आरोपों में निलंबित हो चुके हैं।
सबसे चर्चित घटनाओं में जुगसलाई थाना मारपीट मामला शामिल है। सैनिक सूरज राय और उनके चचेरे भाई विजय राय के साथ कथित मारपीट के बाद पूर्व सैनिकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जुगसलाई थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सचिन कुमार दास, पांच दारोगा समेत कुल आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। इसे शहर के पुलिस इतिहास की बड़ी कार्रवाइयों में माना गया, जहां एक साथ पूरे थाना स्तर पर कार्रवाई हुई।
इसी तरह, 2023 में बिरसानगर थाना में वरीय अधिकारियों के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में थाना प्रभारी प्रभात कुमार, एसआई दीपक कुमार और एक मुंशी को निलंबित किया गया। वहीं, साकची थाना में जुआ अड्डे पर छापेमारी के दौरान बरामद रकम के कथित बंटवारे के आरोप में तीन दारोगा और दो सिपाहियों पर कार्रवाई हुई थी।
इसके अलावा, 2020 में लॉकडाउन अवधि के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद युवक की मौत मामले में बिरसानगर थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित किए गए थे। 2021 में एक युवती से यौन शोषण के आरोप में एक दारोगा पर कार्रवाई हुई, जबकि 2024 और 2026 में अभद्र व्यवहार, गश्ती ड्यूटी में लापरवाही और ड्यूटी के दौरान सोने जैसे मामलों में भी कई पुलिसकर्मी सस्पेंड किए गए।
इस बीच, जुबिली अम्यूजमेंट पार्क के पास दो गुटों के बीच हुई मारपीट और जिला प्रशासन के खिलाफ अभद्र टिप्पणी का वीडियो वायरल होने से शहर में कानून-व्यवस्था को लेकर बहस और तेज हो गई है।
आम लोगों का कहना है कि केवल निलंबन कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जरूरत है कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई, जवाबदेही तय करने की व्यवस्था और निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाए। क्योंकि जब कानून लागू कराने वाली एजेंसी पर ही सवाल उठने लगें, तो जनता का भरोसा बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है।


