
उदित वाणी जमशेदपुर : दक्षिण करनडीह पंचायत में मुखिया प्रत्याशी की निर्वतमान मुखिया मोनिका हेम्ब्रम का नामांकन रद्द करने से नाराज करनडीह के ग्रामवासियों ग्रामसभा आयोजित कर वोट बहिष्कार की घोषणा कर दी है. ग्राम सभा का आरोप है कि संताल महिला का नामांकन रद करने के पीछे विरोधियों की सुनियोजित योजना है. करनडीह सारजमटोला के ग्राम प्रधान सालखू माझी के नेतृत्व में ग्रामसभा में सर्वसम्मति से वोट बहिष्कार का निर्णय लिया गया और कहा कि पंचायत चुनाव में इस बार दक्षिणी करनडीह के लोग हिस्सा नहीं लेंगे. माझी ने जमशेदपुर अंचल के सीओ को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने सीओ पर व्यक्तिगत दुश्मनी साधने का आरोप लगाया है. ग्राम प्रधान ने स्पष्ट कहा कि अगर सीओ चाहते तो संताल महिला का नामांकन रद नहीं होता. मात्र एक हस्ताक्षर के कारण ही महिला का नामांकन रद करना एक सोची समझी साजिश का नतीजा है. जबकि स्क्रूटनी के दौरान या उससे पहले आगाह किया जा सकता था. करनडीह में हुई ग्रामसभा में दक्षिणी करनडीह के अलावा आस पड़ोस के लोग भी शामिल हुए थे और संताल महिला के साथ अन्याय से खफा दिखे. लोगों का कहना था कि संताली महिला का नामांकन रद कर पक्षपात किया गया है. एक सप्ताह पहले डीसी से भी इसकी शिकायत की गई थी. इस दौरान लिखित ज्ञापन देकर पूरे मामले से डीसी को अवगत कराया गया था. बावजूद डीसी की ओर से किसी तरह की कोई पहल नहीं किए जाने के कारण दक्षिण करनडीह में ग्रामसभा का आयोजन कर वोट का बहिष्कार करने की घोषणा रविवार को की गई. लोगों का तर्क है कि कई मामलों में शिकायतों के बावजूद नामांकन रद नहीं किया गया जबकि आदिवासी महिला के मामले में दुराग्रहपूर्ण व्यवहार किया गया है. ग्रामसभा में नीलसेन सरदार, रंजीत राय, लाल सिंह सरदार, रसिका आल्डा समेत कई ग्रामीण मौजूद थे.
प्रस्तावक थे मौजूद, नहीं लिया हस्ताक्षर : मोनिका
दक्षिणी करनडीह पंचायत की मुखिया प्रत्याशी मोनिका हेंब्रम के नामांकन पत्र में उनके प्रस्तावकों का हस्ताक्षर नहीं था. इसे लेकर उनका नामांकन रद्द कर दिया गया था. पिछले मंगलवार को मुखिया प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ डीसी ऑफिस गई जहां उन्होंने डीसी से मामले की शिकायत की. मोनिका ने बताया कि उनके प्रस्तावक नामांकन कक्ष में मौजूद थे.अधिकारियों ने लापरवाही की है. उनका हस्ताक्षर जानबूझकर नहीं लिया गया. उन्होंने सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने की मांग की है कि उनके प्रस्तावक ब्लॉक परिसर में ही मौजूद थे. लेकिन चुनाव से जुड़े अधिकारियों ने लापरवाही बरती और हस्ताक्षर नहीं लिया. उन्होंने मांग की कि उनका नामांकन बहाल किया जाए. वरना पंचायत चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रखंड निर्वाचन अधिकारी सीओ अमित कुमार श्रीवास्तव ने गलत हवाला देकर उनका नामांकन रद्द कर दिया है.

