
उदित वाणी, जमशेदपुर: सिनेमा के रूपहले पर्दे पर आने से पहले ही विवादों व चर्चाओं को केंद्र बन चुकी फिल्म द केरल स्टोरी रिलीज होने के बाद अब जमशेदपुर समेत पूरे देश में धूम मचा रहे हैं.
इस फिल्म को देखने बड़ी संख्या में दर्शक सिनेमाघरों में उमड़ रहे हैं और इसकी सराहना भी कर रहे हैं. शहर के बिष्टुपुर स्थित पीजेपी सिनेपोलिस व मानगो एनएच 33 स्थित आईलेक्स में इस फिल्म का प्रदर्शन किया जा रहा है. जानकार बता रहे हैं कि फिल्म से सभी शो भर जा रहे हैं.
पीजेपी सिनेपोलिस के पहले शो में प्रीमियम सीटें सुबह 10 बजे ही लगभग बिक चुकी थीं. आईलेक्स में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति थी. शनिवार को दूसरे दिन भी दर्शकों का उत्साह कुछ ऐसा ही देखा गया.
विपुल अमृतलाल शाह द्वारा निर्मित और अदा शर्मा, योगिता बिहानी, सोनिया बलानी और सिद्धि इडनानी अभिनीत सुदीप्तो सेन की बहुप्रतीक्षित फिल्म द केरल स्टोरी शुक्रवार को जमशेदपुर में भी जबरदस्त सकारात्मक प्रतिक्रिया के साथ स्क्रीन पर आई, फिल्म हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु और मलयालम भाषाओं में भी रिलीज हुई है.
अपने व्यापक प्रचार और विवाद के साथ साथ, शानदार समीक्षाओं के कारण इस फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता पहले से ही बढ़ गयी थी जो अब पर्दे पर नजर आ रही है.
बिष्टुपुर में सिनेमा देखकर निकले आयुष कुमार ने प्रशंसा करते हुए कहा कि एक समीक्षक ने ठीक ही लिखा है कि द केरला स्टोरी देखने के बाद, आप देश की वर्तमान स्थिति के बारे में कई सवाल छोड़ सकते हैं. यह विचारोत्तेजक फिल्म विचलित करने वाली है और निश्चित रूप से प्रभाव छोडऩे में कामयाब होती है.
इसीतरह मानगो में निहारिका ने कहा कि सच्ची कहानियों पर आधारित, द केरल स्टोरी केरल की महिलाओं के दिल दहला देने वाले अनुभवों का एक नाटकीय प्रतिनिधित्व है, जिन्हें कट्टरपंथी बना दिया गया था और आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया) में शामिल होने के लिए भेजा गया था.
बताते चलें कि फिल्म के रिलीज से पहले निर्माता विपुल शाह ने फिल्म के विषय पर अपनी गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था, सुदीप्तो के साथ पहली मुलाकात के दौरान, जब उन्होंने मुझे इसका वर्णन किया तो मैं फूट-फूट कर रो पड़ा.
मैंने उसी दिन इस फिल्म को प्रोड्यूस करने का फैसला किया था. हम एक ऐसी फिल्म बनाना चाहते थे जो बहुत यथार्थवादी, निष्पक्ष और चित्रित घटनाओं के लिए सटीक हो.
द केरल स्टोरी से जुड़ा विवाद
द केरल स्टोरी फिल्म में कथित रूप से दावा किया गया था कि केरल की करीब 32,000 महिलाओं का जबरन धर्मांतरण कराकर उन्हें मुस्लिम बनाया गया. उनमें से बहुतों को सीरिया ले जाया गया था, जब आतंकी संगठन आईएसआईएस का आतंक वहां चरम पर था.
आरोप लगाए गए थे कि फिल्म द केरल स्टोरी में लव जिहाद के नाम पर समाज में जहर फैलाने की कोशिश की गई है. आरोप यह भी लगाया गया था कि इस फिल्म में एक खास समुदाय को अपमानित किया गया है. इसी आधार पर फिल्म को बैन करने तक की मांग की जा रही थी.
दिल्ली के जेएनयू में द केरल स्टोरी की स्क्रीनिंग भी की गई. इस दौरान हॉल में जय श्रीराम, हर-हर महादेव और वंदे मातरम के नारे भी लगाए गए. वहां लेफ्ट से जुड़े संगठनों जैसे कि एसएफआई ने इस स्क्रीनिंग का विरोध किया.
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने फिल्म निर्माताओं की आलोचना की और इसे संघ परिवार का प्रोपेगेंडा बताया. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने फिल्म निर्माताओं पर प्रदेश की वास्तविकता को बहुत अतिशयोक्ति और विकृत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया. दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने द केरल स्टोरी से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करने से मना कर दिया और याचिकाकर्ताओं से संबंधित हाई कोर्ट में जाने को कहा.

