
उदित वाणी, जमशेदपुर: टाटा स्टील के वीपी (कारपोरेट सर्विसेस) चाणक्य चौधरी ने बताया कि पिछले चार साल में टाटा स्टील ने शहर में पांच लाख से ज्यादा पेड़ लगाए हैं.
हमारी कोशिश है कि शहर का ग्रीन कवरेज और बढ़ें और हम जैव विविधता और सस्टेनेबिलिटी के मामले में देश में आगे रहे. एक विशेष बातचीत में चौधरी ने बताया कि एक साल में हमने सवा लाख पेड़ों को लगाया है. शहर की सड़कों के चौड़ीकरण में बहुत जरूरी होने पर ही हमने पेड़ों को काटा है.
हमारी कोशिश रही है कि एक पेड़ कटे, तो उसकी जगह 50 लगे, क्योंकि एक पेड़ को तैयार होने में कई साल लगते हैं. चौड़ीकरण के रास्ते में आए बड़े पेड़ों को रिलोकेट भी किया गया है.
जैव विविधता को लेकर कई नई पहल
जैव विविधता और सस्टेनेबिलिटी को लेकर पिछले कुछ सालों में हमारी कई नई पहल हुई है. कदमा में जैव विविधता पार्क से लेकर नेचर पार्क, जूलॉजिकल गार्डेन और एग्रिको में तालाब को पुनर्जीवित किया गया है.
इसका असर भी दिखना शुरू हो गया है. केवल नेचर पार्क में 19 हजार से ज्यादा पेड़ लगाए गये हैं. हमारी कोशिश है कि शहर की हरियाली मेन्टेंड रहें और प्रदूषण का स्तर नहीं बढ़े
40 मिलियन टन उत्पादन क्षमता का लक्ष्य
चाणक्य चौधरी ने बताया कि न्यूट्रल जीरो लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई मोर्चे पर हम एक साथ काम कर रहे हैं. टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट की उत्पादन क्षमता को हमने 10-11 मिलियन टन पर हमने रोक दिया है. अब हम अपनी क्षमता का विस्तार ओडिशा में ज्यादा कर रहे हैं. हमारी कोशिश है कि अगले 10 साल में टाटा स्टील की उत्पादन क्षमता 40 मिलियन टन हो. लेकिन इस विस्तारीकरण के साथ ही हम अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने और कार्बन न्यूट्रल (नेट जीरो) के लक्ष्य को पाने की दिशा में भी अग्रसर रहेंगे.
कंपनी के अंदर ग्रीन टेक्नोलॉजी, सर्कुलर इकोनोमी को बढ़ावा
बकौल चौधरी, कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए हम ग्रीन टेक्नोलॉजी को तेजी से अपना रहे हैं. जमशेदपुर के प्लांट को नई तकनीक से लैस किया जा रहा है. साथ ही हम सर्कुलर इकोनोमी को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसमें वेस्ट से बेस्ट निकालने की कोशिश जारी है. यही नहीं सप्लाई चेन को भी अब ग्रीन कर रहे हैं. सामानों को लाने और भेजने में कई ग्रीन पहल हुई है.
पिछले 10 साल में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है
शहर की हवा के प्रदूषित होने पर पूछे गये सवाल के बारे में कहा कि पिछले 10 सालों में शहर में दोपहिया और चारपहिया की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. लेकिन अब अच्छी बात यह है कि इलेक्ट्रिक वेहिकल और हाइब्रिड वाहन आ रहे हैं. धीरे-धीरे ही सही, ईवी को लोग अपना रहे हैं. जब ईवी की संख्या में बढ़ोतरी होगी तो कार्बन उत्सर्जन कम होगा.
साथ ही हमारी कोशिश है कि शहर जाममुक्त हो, क्योंकि शहर की हवा को प्रदूषित करने में जाम की भूमिका बहुत ज्यादा होती है. घंटों जाम में फंसी हुई गाड़ियों से हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित होती है.
हम शहर की सड़कों का लगातार चौड़ीकरण कर रहे हैं ताकि जाम की स्थिति नहीं बनें. लेकिन हमारे रोड सर्वे में यह बात हमेशा सामने आ रही हैं कि सड़कों पर अनावश्यक गाड़ियों की पार्किंग कर दी जाती है, जिससे सड़कें संकरी हो जाती हैं और स्कूल की छुटि्टयों के समय जाम लग जाता है.
अगर शहरवासी अनुशासित हो और गाड़ियों की पार्किंग सड़क पर नहीं करें, तो शहर के प्रदूषण को बहुत हद तक कम किया जा सकता है.

