
उदित वाणी, रांची: झारखण्ड हाईकोर्ट के जस्टिस एस एन पाठक ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर 1972 में स्टाॅक होम अधिवेशन में किये गए समझौते का अधिकांश देशों द्वारा पालन नहीं किया जा रहा है.
हमारे देश भारत में भी इसका पालन नहीं हो रहा है. जो काफी चिंताजनक है. झारखंड में जिस तरह से दामोदर नद का कायाकल्प हुआ है. वैसी ही राज्य के अन्य नदियों पर कार्य करने की आवश्यकता है. जस्टिस पाठक मोराहाबादी मैदान में आयोजित 10 दिवसीय पर्यावरण मेले के उध्दघाटन के अवसर पर बोल रहे थे.
मेले को उध्दघाटन जस्टिस पाठक, राज्य सरकार के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव, जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय, रांची के विधायक सीपी सिंह एवं सीसीएल के सीएमडी पीएम प्रसाद ने संयुक्त रूप से किया.
मेले में पहले दिन लगभग 15 हजार लोगों जुटे तथा दुकानों में काफी खरीदारी हुई. पहले दिन लगभग 40 लाख रूपये का मेले में कारोबार हुआ. इस अवसर पर मेले के संरक्षक विधायक सरयू राय ने कहा कि पर्यावरण को संतुलित एवं संरक्षित केवल संस्थानों व सरकारों के भरोसे नहीं किया जा सकता है.
हमें इस दिशा में व्यक्तिगत स्तर पर भी पहल एवं प्रयास करने की आवश्यकता है. पर्यावरण के क्षेत्र में जितना अधिक हम योगदान कर सकते हैं. हमें करना चाहिए. इसलिए हमने मेले में पर्यावरण हितैषी उत्पादों के स्टाॅल को ही लगाने की अनुमति दी है.
उन्होंने कहा कि बर्ष 2017 में जब मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला तो उन्होंने कहा कि गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के उद्देश्य से नमामि गंगा एवं अन्य कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं. जिसमें हजारो करोड़ रूपये खर्च हो रहा है. इस पर मैंने कहा कि हमने तो एक रूपये खर्च किये बिना दामोदर नदी को औद्योगिक प्रदूषण से लगभग मुक्त कर लिया है.
नदी एवं नद को साफ करने के लिए पैसे की आवश्यकता नहीं है. यह सुनकर प्रधानमंत्री आश्चर्यचकित हो गए. विधायक राय ने कहा कि हमें नदी को गंदा करनेवाले तत्वों को रोकना होगा. जिससे नदी का प्रदूषण नियंत्रित रहेगा.
आज दामोदर औद्योगिक प्रदूषण से लगभग 90 प्रतिशत से अधिक मुक्त हो चुका है. मुख्य अतिथि डा रामेश्वर उरांव ने कहा कि मेरा राँची से 1963-64 से नाता रहा है. तब यहां जून माह की रात में भी कंबल ओढ़ना पड़ता था और रांची के घरों व कार्यालयों में पंखा का कोई कंसेप्ट नहीं था. तब यहां घने जंगल थे. तालाब सरोवर की बहुलता थी.
आज रांची अपना अस्तित्व खो चुकी है. यह परिस्थिति मानव निर्मित है. मौसम की अनियमितता के कारण फसलों की उपज में भी प्रतिकूल असर पड़ा है. हमें प्रकृति से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए.
सीसीएल के सीएमडी पीएम प्रसाद ने कहा कि एक टन कोयला उत्पादन में ढ़ाई टन कार्बन डाईआक्साईड और तीस किलोग्राम सल्फर डाईआक्साइड का उत्सर्जन होता है. जो ग्लोबल वार्मिंग का एक बहुत बड़ा कारण है. बर्ष 2050 तक हम अक्षय ऊर्जा में आत्मनिर्भर हो जायेंगे. झारखण्ड में जमीन मिलने पर सीसीएल 20 मेगावाट का सोलर पार्क लगायेगा.

