
उदित वाणी जमशेदपुर: केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए श्रम कानून (लेबर कोड) का असर अब देश के बड़े औद्योगिक घरानों पर साफ दिखने लगा है. 21 नवंबर 2025 से लागू चार नए श्रम कोड वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल सुरक्षा ने न केवल श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत किया है, बल्कि कंपनियों के लिए अनुपालन (compliance) की नई चुनौतियां भी खड़ी की हैं. विशेष रूप से टाटा स्टील जैसी बड़ी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है, जिसका बदलाव शुरू हो गया है. सूत्रों का कहना है कि टाटा स्टील में होने वाले ग्रेड रिवीजन भी अब इन नये श्रम कानूनों के आलोक में होंगे.
कंपनियों पर क्या होगा असर
विशेषज्ञों के अनुसार नए श्रम कानूनों से कंपनियों के वेतन ढांचे, लागत और मानव संसाधन नीतियों में बड़ा बदलाव आएगा.
1.नए नियम के तहत वेतन की एक समान परिभाषा लागू होने से पीएफ, ग्रेच्युटी और बोनस की गणना बढ़ेगी, जिससे कंपनियों की लागत बढ़ सकती है.
2.सभी कर्मचारियों, यहां तक कि कॉन्ट्रैक्ट और गिग वर्कर्स को भी सामाजिक सुरक्षा का दायरा मिलेगा.
3.कार्य के घंटे, सुरक्षा मानकों और नियुक्ति प्रक्रियाओं में भी अधिक पारदर्शिता और नियमबद्धता आएगी.
हालांकि, बेहतर कार्य वातावरण और सुरक्षा से कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कंपनियों को दीर्घकाल में लाभ मिल सकता है.
टाटा स्टील की तैयारियां
टाटा स्टील ने इन बदलावों को ध्यान में रखते हुए पहले से ही कई स्तरों पर तैयारियां शुरू कर दी हैं.
वेतनसंरचना में बदलाव
कंपनी अपने कर्मचारियों के सीटीसी और वेतन संरचना को नए नियमों के अनुरूप पुनर्गठित कर रही है, ताकि कानूनी अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके.
एचआरऔर आईआर नीतियों का अपडेट
नए औद्योगिक संबंध कोड के तहत नियुक्ति, छंटनी और विवाद समाधान प्रक्रियाओं को अपडेट किया जा रहा है.
सामाजिकसुरक्षा विस्तार
कॉन्ट्रैक्ट और असंगठित श्रमिकों को भी पीएफ, ईएसआईसी जैसी सुविधाओं में शामिल करने की दिशा में काम किया जा रहा है.
डिजिटलऔर एजाइल सिस्टम का उपयोग
कंपनी अपने पहले से चल रहे डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और एजाइल वर्किंग मॉडल का उपयोग कर श्रम कानूनों के अनुपालन को आसान बना रही है.
स्वास्थ्यऔर सुरक्षा मानकों को मजबूत करना
नए कानून के तहत कार्यस्थल सुरक्षा, स्वास्थ्य जांच और कार्य परिस्थितियों में सुधार के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं.
उद्योग पर व्यापक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि स्टील सेक्टर सहित मैन्युफैक्चरिंग उद्योग में ये बदलाव लागत बढ़ाने के साथ-साथ कार्यकुशलता और पारदर्शिता भी बढ़ाएंगे. कुछ कंपनियों को शुरुआती चरण में अतिरिक्त वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ सकता है. जैसा कि टाटा समूह की अन्य कंपनियों में एकमुश्त खर्च के रूप में देखा गया है. नए श्रम कानूनों के लागू होने से जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर में काम करने वाले हजारों श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा. वहीं, टाटा स्टील जैसी कंपनियां इन बदलावों को अपनाकर खुद को अधिक संगठित, पारदर्शी और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.

