
उदित वाणी, जमशेदपुर: आधुनिक युग में शिक्षा के तौर-तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव आ रहे हैं। इसी दिशा में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की पहल ‘दीक्षा’ ऐप अब विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए एक संपूर्ण डिजिटल लर्निंग गेटवे बनकर उभरा है। इस ऐप के माध्यम से केंद्रीय बोर्डों की पाठ्यपुस्तकों को डिजिटल प्रारूप में तो उपलब्ध करा ही दिया गया है, अब राज्य बोर्ड की पाठ्य पुस्तकें भी विद्यार्थियों को उपलब्ध करा दी गई है, जिससे शिक्षा की पहुंच देश के दूर-दराज के इलाकों तक भी अब सुलभ हो गई है।
दीक्षा ऐप की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापकता है। यह केवल एक ई-पुस्तकालय नहीं है, बल्कि एक जीवंत डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म है। अब छात्र अपनी स्कूली किताबों के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो और इंटरैक्टिव कंटेंट के जरिए जटिल विषयों को आसानी से समझ सकते हैं। अपनी तैयारी को परखने के लिए ऐप पर विशेष रूप से प्रैक्टिस क्विज़ की सुविधा भी दी गई है, जो छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है। इस डिजिटल बुनियादी ढांचे का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब विद्यार्थी किसी भी समय और कहीं भी अपनी सुविधानुसार शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं, जिससे सीखने की प्रक्रिया अब स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रह गई है।
यह प्लेटफॉर्म न केवल छात्रों के लिए बल्कि शिक्षकों के पेशेवर विकास के लिए भी एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। शिक्षकों के लिए इस ऐप पर विशेष रूप से तैयार किए गए ट्रेनिंग कोर्स उपलब्ध कराए गए हैं। इन पाठ्यक्रमों की मदद से शिक्षक नवीनतम शिक्षण पद्धतियों और तकनीकी कौशलों से लैस हो सकेंगे, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव कक्षा में छात्रों के सीखने के अनुभव पर पड़ेगा। एनसीईआरटी द्वारा संचालित यह ऐप एंड्रॉइड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, जिसे एक क्यूआर कोड के माध्यम से भी आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है।
शिक्षा मंत्रालय का यह कदम ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान को मजबूती प्रदान करता है। केंद्रीय और राज्य बोर्डों के संसाधनों का एक ही मंच पर एकीकरण होने से देश की शैक्षिक गुणवत्ता में एकरूपता आने की उम्मीद है। दीक्षा ऐप आज के समय में एक ऐसा सशक्त माध्यम बन गया है जो छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को एक सूत्र में पिरोते हुए समावेशी शिक्षा के सपने को साकार कर रहा है।

