
उदित वाणी,झारखंड : झारखंड में बीएड सत्र 2015-2017 के दौरान नियुक्त हुए अवैध टीजीटी शिक्षकों की सेवा समाप्ति का रास्ता साफ हो गया है। कार्मिक प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के सचिव के अनुमोदन के पश्चात सरकार के अवर सचिव ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को एक कड़ा पत्र निर्गत करने का आदेश दिया है, जिसमें राज्य स्तर पर ऐसे सभी अवैध शिक्षकों का वेतन तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्देश दिया गया है। यह पूरा मामला नियुक्ति नियमावली और विज्ञापन की शर्तों के उल्लंघन से जुड़ा है, जिसमें निर्धारित तिथि 25 अप्रैल 2017 तक अभ्यर्थियों का शैक्षणिक प्रशिक्षण पूर्ण नहीं था। अब ऐसे शिक्षकों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अकेले पूर्वी सिंहभूम में ऐसे 18 शिक्षक हैं।
इस अनियमितता का आरोप जमशेदपुर के पारडीह निवासी कार्त्तिक चन्द्र साव ने लगाया था और इसे लेकर विभागीय कार्रवाई के लिए विभाग को कई पत्र लिखे थे। कार्तिक साव ने जुलाई 2024 में सर्वप्रथम इस मुद्दे को जिला प्रशासन के समक्ष उठाया था। इस मामले में जांच होने के बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कोल्हान प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक (आरडीडीई) की जांच रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। विभाग ने स्पष्ट किया कि नियुक्ति शर्तों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। कार्मिक विभाग ने सभी साक्ष्यों के गहन अवलोकन के बाद अब वेतन रोकने का आदेश निकालने का निर्देश जारी किया है।
क्या है पूरा मामला :
मामला झारखंड में बीएड सत्र 2015-2017 के दौरान हुई शिक्षकों की नियुक्ति में बड़ी अनियमितता और नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है। मुख्य विवाद नियुक्ति की ‘कट-ऑफ’ तिथि और शैक्षणिक योग्यता की पूर्णता को लेकर है। इस पूरे मामले की जड़ नियुक्ति नियमावली और विज्ञापन में दी गई शर्तों का उल्लंघन है। नियुक्ति किए आधिकारिक विज्ञापन के अनुसार, अभ्यर्थियों का शैक्षणिक और प्रशिक्षण (बीएड ) 25 अप्रैल 2017 से पहले पूर्ण हो जाना चाहिए था। आरोप है कि बीएड सत्र 2015-17 के कई ऐसे अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया, जिनका परिणाम या प्रशिक्षण इस निर्धारित तिथि (25 अप्रैल 2017) तक पूरा नहीं हुआ था। नियमों के विरुद्ध जाकर इन अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई, जिससे हजारों योग्य उम्मीदवार चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए।
जांच की प्रक्रिया और घटनाक्रम
इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब जमशेदपुर के पारडीह निवासी कार्त्तिक चन्द्र साव ने इसके खिलाफ शिकायत की। सबसे पहले पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त और जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) को साक्ष्य सौंपे गए। इसके बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक (आरडीडीई ) को जांच का जिम्मा सौंपा। हालांकि, उनकी पहली रिपोर्ट को विभाग ने ‘गलत और असंतोषजनक’ मानकर खारिज कर दिया। इसके बाद विभाग ने पुनः आरडीडीई से स्पष्ट रिपोर्ट मांगी कि क्या इन शिक्षकों की योग्यता 25 अप्रैल 2017 से पहले की थी या नहीं।

