
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने नए साल 2026 के संदेश में कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि वे और उनके परिवार 2026 में स्वास्थ्य और खुशियों से भरे रहें. उन्होंने वर्ष 2025 के कठिन समय के लिए कर्मचारियों की मेहनत की सराहना की और समूह की सफलताओं पर प्रकाश डाला. चंद्रशेखरन ने प्रेरणादायक कहानियां साझा कीं, जैसे ओडिशा की एक दादी का साक्षरता कार्यक्रम से फूल की दुकान चलाना, एआई-ड्रोन से कृषि अपशिष्ट प्रबंधन करने वाली युवती और सीएसआर से क्वांटम फिजिक्स में पीएचडी करने वाली छात्रा. उन्होंने महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर खुशी जताई और कहा कि ये कहानियां भविष्य के लिए आशा और ऊर्जा देती हैं.कुल मिलाकर, उनका संदेश आशावादी है, जिसमें अनिश्चितता को अवसर में बदलने, एआई के माध्यम से नवाचार, और मजबूत निष्पादन पर जोर है, ताकि टाटा समूह अपने इतिहास के सबसे सफल वर्षों में प्रवेश करे.
2025 की चुनौतियां:
चंद्रशेखरन ने 2025 को “अनिश्चितता से भरा और विनम्र करने वाला वर्ष” बताया, जिसमें वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बनी रही. मुख्य चुनौतियां इस प्रकार हैं:
वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव: उन्होंने उल्लेख किया कि भू-राजनीतिक तनावों ने परिचालन चुनौतियां बढ़ाईं, जबकि तकनीकी प्रगति नियामकों की गति से तेज रही.
प्राकृतिक और दुर्घटना संबंधी घटनाएं: एयर इंडिया 171 की दुर्घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसने सभी को प्रभावित किया, लेकिन समूह के सदस्यों ने एकजुट होकर मदद की.
तकनीकी कमजोरियां: जेएलआर पर साइबर हमले का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक के लाभों के साथ बड़ी कमजोरियां भी हैं, जैसे मूल्य श्रृंखला और तकनीकी दृष्टिकोण से लचीलापन की जरूरत.
समग्र अस्थिरता: वैश्विक विकास अपेक्षा से स्थिर रहा, लेकिन यूरोप में राजकोषीय विस्तार, चीन में उच्च विकास और मुद्रास्फीति में कमी के बावजूद अनिश्चितता बनी रही. भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत रही, लेकिन वैश्विक जोखिम प्रभावित करते रहे.
वे मानते हैं कि अनिश्चितता अब स्थिर हो गई है और सवाल यह नहीं कि झटके आएंगे या नहीं, बल्कि हम उनसे कितनी अच्छी तरह उबर सकते हैं.
2026 के लिए प्राथमिकताएं और एआई समेत अन्य चुनौतियां पर विचार
चंद्रशेखरन ने 2026 को अनिश्चितता और अस्थिरता का एक और वर्ष बताते हुए इसे रणनीतिक अवसरों से भरा माना. उन्होंने जोखिम लेने, अनुशासित निष्पादन और दीर्घकालिक सोच पर जोर दिया. विशेष रूप से एआई और अन्य क्षेत्रों पर उनके विचार ये है.
एआई और तकनीकी निवेश: समूह एआई में बड़े निवेश कर रहा है, जैसे वनजीडब्ल्यू एआई डेटा सेंटर की स्थापना.टीसीएस को दुनिया की सबसे बड़ी एआई-नेतृत्व वाली तकनीकी सेवा कंपनी बनाने की दिशा में बदलाव. भारत-विशिष्ट और उद्योग-विशिष्ट डेटा वाले एआई मॉडल विकसित करना.एआई को पांच स्तंभों पर आधारित: एआई-नेतृत्व वाली संस्कृति, मानव प्लस एआई मॉडल, भविष्य-तैयार प्रतिभा, उद्योग-आधारित डेटा/एआई इंफ्रा/एप्लिकेशन और सहयोग/साझेदारी. उन्होंने कहा कि सभी नई फैक्टरियां एआई-फर्स्ट डिजाइन की गई हैं, जो बेहतर उत्पादन गुणवत्ता और उत्पादकता सुनिश्चित करेंगी.एआई को साइलो में नहीं, बल्कि एकीकृत रूप से लागू करने पर जोर दिया, जो समूह के लिए बड़ा अवसर है.
निष्पादन:
दुनिया में बदलाव के बीच स्थिरता के लिए लक्ष्य निर्धारित करना, प्रतिबद्धताओं को पूरा करना और सुसंगत प्रदर्शन के लिए प्रक्रियाएं बनाना महत्वपूर्ण
टीमवर्क: प्रतिभा से अधिक टीमवर्क को महत्व देते हुए कहा कि कुशल लोग मिलकर अकेले प्रतिभाशाली से अधिक हासिल करते हैं. सहयोग को बढ़ावा दें और काम को आनंददायक बनाएं.
जोखिम लेना और नवाचार: सतर्कता की बजाय साहसिक कदम उठाएं, क्योंकि आधे-अधूरे उपाय असफल होते हैं. दीर्घकालिक महत्वपूर्ण चीजों पर ध्यान, जैसे उत्कृष्ट अनुसंधान में निवेश.
टाटा ट्रांसफॉर्मेशन प्राइज का जिक्र: 2025 के विजेताओं में जेनेटिक इंजीनियरिंग से चावल की पैदावार बढ़ाना, नैनोरोबोट से कैंसर उपचार, और बैक्टीरिया से सुरक्षित रसायन उत्पादन शामिल.
स्थिरता: ग्रीन स्टील उत्पादन शुरू करना, टाटा मोटर्स की 2.5 लाख ईवी कारें (भारत में 66 प्रतिशत ईवी) और उन्नत विनिर्माण में प्रगति.
लचीलापन: साइबर सुरक्षा, मूल्य श्रृंखला और तकनीकी झटकों से उबरने पर फोकस. भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने में योगदान.
अन्य सफलताएं और अवसर: उन्नत विनिर्माण में प्रगति (जैसे आईफोन, सी-295 विमान), नई फैक्टरियां, अधिग्रहण (आईवेको), लिस्टिंग (टाटा कैपिटल) और स्टोर विस्तार (ट्रेंट, इंडियन होटल्स). भारत की अर्थव्यवस्था को तीसरी सबसे बड़ी बनाने में टाटा का योगदान.

