
उदित वाणी, जमशेदपुर: डॉ. गौतम सूत्रधर को नेशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) जमशेदपुर का नया निदेशक बनाया गया है. डॉ.सूत्रधार वर्तमान में एनआईटी मणिपुर के निदेशक है. डॉ.सूत्रधर फाउंड्री टेक्नोलॉजी में देश के अग्रणी विशेषज्ञों में शामिल हैं.
डॉ.सूत्रधार का जमशेदपुर से पुराना नाता रहा है. आईआईटी खड़गपुर से एमटेक करने के दौरान उन्होंने छह माह तक टाटा स्टील में फाउंड्रेी के विशेषज्ञ के तौर पर काम किया था. डॉ.सूत्रधार ने इम्फाल से दूरभाष पर बताया कि वे जून 1986 से लेकर जनवरी 1987 तक टाटा स्टील के लिए काम किया और बिष्टुपुर में रहते थे.
यही नहीं उनकी बेटी जमशेदपुर स्थित अवध मेडिकल डेंटल कॉलेज में पढ़ाई की है. इसे लेकर भी जमशेदपुर आना-जाना रहा. बकौल डॉ.सूत्रधर, बीआईटी मेसरा रांची से पीएचडी की है और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाउंड्री एंड फोर्ज टेक्नोलॉजी रांची में भी पढ़ाया.
इस तरह झारखंड से काफी नजदीक का रिश्ता रहा है. मूल रूप से खड़गपुर का हूं और फिलहाल कोलकाता में परिवार रहता है. कोलकाता और जमशेदपुर की दूरी ज्यादा नहीं है. मैं एनआईटी जमशेदपुर को लेकर काफी एक्साइटेड हूं. जमशेदपुर को लेकर कई पुरानी यादें हैं. कोशिश होगी कि फाउंड्री में अपनी विशेषज्ञता का लाभ इंडस्ट्री-एकेडमिया लिंकेज को बढ़ाने में इस्तेमाल कर सकूं.
एनआईटी मणिपुर की वित्तीय सेहत को ठीक करने में काफी समय लग गये
बकौल डॉ.सूत्रधर, एनआईटी मणिपुर में पांच साल के कार्यकाल में वहां की वित्तीय सेहत को सुधारने में काफी समय लग गया. दो साल लग गये इंटर्नल ऑडिट कराकर वित्तीय स्थिति को ठीक करने में.
वित्तीय अनियमितता को लेकर काफी शिकायतें थी, जिसे मैंने ठीक किया. पांच साल में कोई ढ़ाचागत संरचना का विकास नहीं कर पाया, क्योंकि केन्द्र सरकार ने इस दौरान पैसा नहीं दिया. मैंने बिना एक पैसे लिए आंतरिक स्त्रोत से कुछ काम किए. जब गया तो संस्थान की नेशनल इन्स्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क 150-200 बैंड के बीच था, जिसे 100-150 के बीच लाया. शिक्षकों के पद को भरने के लिए तीन बार इन्टरव्यू हुए और शिक्षकों को प्रोन्नति दी.
एनआईटी जमशेदपुर को टॉप-50 रैंक में लाना मकसद
नये निदेशक डॉ.गौतम सूत्रधर ने बताया कि उनका मकसद एनआईटी जमशेदपुर को टॉप-50 रैंक में लाना होगा. उन्होंने कहा कि देश के सबसे पुराने संस्थान होने के बावजूद एनआईटी जमशेदपुर में अभी तक चाहरदीवारी नहीं बन पाई है, जो विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर एक समस्या है.
हमारी कोशिश होगी कि लोकल डायनेमिक्स को ध्यान में रखकर इस काम को किया जाय. हमारा एप्रोच ओपन इंडेड रहेगा और कोशिश होगी कि सारे शेयरधारकों से बात कर इस समस्या का समाधान हो.
फाउंड्री टेक्नोलॉजी में देश के चुनींदा विशेषज्ञों में शामिल हैं डॉ.गौतम
डॉ. गौतम सूत्रधर ने 1984 में जलपाईगुड़ी गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज से मेकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री की. बाद में उन्होंने 1986 में आईआईटी खड़गपुर से फाउंड्री टेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता के साथ मेकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की और बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) मेसरा, रांची से इंजीनियरिंग में पीएचडी पूरी की.
हिंदुस्तान मोटर्स लिमिटेड और भारतीय रेलवे में पांच साल तक काम करने के बाद वे 1991 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाउंड्री एंड फोर्ज टेक्नोलॉजी रांची में एक संकाय सदस्य के रूप में शामिल हुए. बाद में लगभग 10 साल तक वे सेरामपुर टेक्सटाइल कॉलेज और कल्याणी सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में अपनी सेवा दी.
2005 में जादवपुर यूनिवर्सिटी ज्वाइन किया
2005 में जादवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता में मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर बने. अप्रैल 2018 में डॉ.सूत्रधर, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) मणिपुर इम्फाल में निदेशक बनें. उन्होंने मेटल मैट्रिक्स कंपोजिट, पॉलिमर मैट्रिक्स कंपोजिट के क्षेत्र में 20 से अधिक एम.टेक थीसिस और 21 पीएचडी छात्रों का पर्यवेक्षण किया है.
देश-विदेश की पत्रिकाओं में 125 से ज्यादा तकनीक पत्र प्रकाशित हुए हैं
डॉ सूत्रधर टाइफेक, नई दिल्ली, एमएसएमई पश्चिम बंगाल और भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए फाउंड्री क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम में सक्रिय रूप से शामिल हैं.
उन्होंने ऑक्सफोर्ड और आईबीएच द्वारा प्रकाशित “डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग: एन इंटीग्रेटेड अप्रोच” और न्यू एज पब्लिशर्स, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित “फाउंड्री प्रोसेस डिजाइन” नामक दो पुस्तकें लिखी हैं. उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के पत्रिकाओं में 125 से अधिक तकनीकी पत्र प्रकाशित किए हैं और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में 50 से अधिक तकनीकी पत्र प्रस्तुत किए हैं.
डॉ.गौतम सूत्रधर ने एआईसीटीई नई दिल्ली, सीएसआईआर नई दिल्ली, यूजीसी नई दिल्ली और डीएसटी नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित कई शोध परियोजनाओं का पर्यवेक्षण किया है. डॉ सूत्रधर द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के फेलो और कई पेशेवर निकायों के सदस्य हैं. वह वर्तमान में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फाउंड्रीमेन के पूर्वी क्षेत्र के अध्यक्ष हैं.
कई देशों का किया है दौरा
उन्होंने 2013 में आईआईएफ प्रतिनिधि के रूप में जापान फाउंड्री का दौरा किया. 2013 में स्लोवेनिया में 53 वीं अंतर्राष्ट्रीय फाउंड्री कांग्रेस में अपना पेपर प्रस्तुत किया और 2014 में विस्कॉन्सिन-मिल्वौकी विश्वविद्यालय यूएस में एक अंतर्राष्ट्रीय फेलो के रूप में दौरा किया.
कई सम्मान मिल चुके हैं
डॉ सूत्रधर को द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) द्वारा दो और द इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन फाउंड्रीमेन द्वारा सर्वश्रेष्ठ पेपर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. उन्हें 1996 में डीएसटी नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित एसईआरसी विजिटिंग फेलोशिप और 2014 में यूरोप यूनियन द्वारा ईएमआईएनटीई फेलोशिप से भी सम्मानित किया जा चुका है.
उन्हें 2017 में आईआईएफ पूर्वी क्षेत्र से समर्पित फाउंड्री प्रोफेसर के रूप में सम्मानित किया गया था. वह राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक हैं.
मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी में “मेक इन इंडिया” पहल के तहत समन्वित परियोजना यानी स्मार्ट फाउंड्री: 2020 का नेतृत्व किया है. डॉ. सूत्रधर आईआईआईटी मणिपुर, मणिपुर तकनीकी विश्वविद्यालय मणिपुर और आईआईएसडब्ल्यूबीएम कोलकाता के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के एआईसीटीई नोमिनी के रूप में भी सदस्य हैं.
उद्योग के क्षेत्र में भी योगदान
अपने अकादमिक योगदान के अलावा उन्होंने फाउंड्री टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उद्योग में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है. डॉ.सूत्रधर ने पूरे देश में इंडियन रेलवे, अर्थमूविंग, टेक्सटाइल, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स में कई कंपोनेंट विकसित किए हैं. वह नए उद्यमियों का भी लगातार समर्थन कर रहे हैं जो फाउंड्री और इसके संबद्ध क्षेत्रों में व्यवसाय शुरू करने में रुचि रखते हैं.

