
उदितवाणी,जमशेदपुर: कहते हैं कि जब रामायण काल में राम सेतु का निर्माण हुआ था तो हर किसी ने उसमें अपनी भूमिका निभाई थी कमोबेश कुछ ऐसी ही स्थिति जुगसलाई आरओबी के निर्माण में दिखी.
केंद्र और राज्य सरकार की तो इसमें सक्रिय भूमिका रही ही, विधायक और सांसद जैसे जनप्रतिनिधियों ने भी अपने स्तर पर पहल कर 52 साल पुराने आरओबी के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभाई.
मंगल कालिंदी के प्रयास से खड़ा हुआ अंतिम पिलर, सीएम ने दिए थे 55 लाख
आरओबी का अंतिम पिलर मंगल कालिंदी के विशेष प्रयास की वजह से ही खड़ा किया जा सका. उनके कहने पर ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विशेष रूप से 55 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की थी. इस पैसे का उपयोग आरओबी निर्माण से विस्थापित हुए गरीब लोगों का आशियाना बनवाने समेत दूसरे जरूरी कार्यों पर किया गया.
यही कारण रहा कि मंगलवार को जुगसलाई आरओबी के उद्घाटन के समय विधायक मंगल कालिंदी काफी गदगद दिखे. उनके हावभाव बता रहे थे कि जुगसलाई के लोगों के आरओबी निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का जो वादा उन्होंने किया था.

वह आज फलीभूत हो गया. उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति जुगसलाई की तमाम जनता की तरफ से आभार प्रकट किया और उन्हें धन्यवाद दिया. विधायक मंगल कालिंदी ने बताया कि शिलान्यास होने के बाद से इस आरओबी के निर्माण में कई अड़चनें आईं, इन्हें दूर करने की उसके स्तर से पहल की गई. तत्कालीन डीसी सूरज कुमार.
मंत्री बन्ना गुप्ता व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भरपूर सहयोग मिला और काम आगे बढ़ता चला गया. मंगल कालिंदी ने कहा कि आरओबी का अंतिम पिलर खड़ा करने में कुछ झोपडिय़ों को हटाना जरूरी था. लेकिन इन झोपडिय़ों में रहनेवाले गरीब असहाय थे.
इस स्थिति को देख उन्होंने मुख्यमंत्री से बात कर 55 लाख रुपए का फंड पास करवाकर उन गरीबों के घरों को दूसरी जगह शिफ्ट करवाया ताकि वह लोग बेलोग बेघर न हो सकें. उसके बाद जाकर रेलवे ओवरब्रिज का आखिरी पिलर खड़ा हुआ. कालिंदी ने कहा कि वे आज काफी खुश हैं. उनके विधायक रहते लोगों की बरसों पुरानी समस्या का समाधान हो गया.
डॉ. अजय के एमपी रहते ही बजट में मिली थी आरओबी की मंजूरी
डॉ. अजय कुमार जब जमशेदपुर के सांसद थे. उसी समय 2012 के रेल बजट मे केंद्र सरकार ने जुगसलाई आरओबी के लिए अपने कोटे के फंट की व्यवस्था की थी. यह डां. अजय की सक्रियता का प्रतिफल था.

इसके बाद डॉ. अजय लगातार इस आरओबी के निर्माण को लेकर अपने स्तर से पहल करते रहे. जब तक सांसद रहे तब तक तो सीधे तौर पर सक्रिय रहे. सांसद नहीं रहने पर भी अपने संपर्कों व शुभचिंतकों के माध्यम से आरओबी निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने में सक्रिय रहे. आरओबी निर्माण पूरा हो जाने पर उन्होंने राज्य सरकार से जल्द से जल्द इसका उद्घाटन कराने की मांग की थी ताकि जुगसलाई वासियों का 52 साल का सपना साकार हो सके.
संसद सत्र के कारण उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं हो सके सांसद
सांसद विद्युत वरण महतो जुगसलाई रेलवे ओवरब्रिज के लोकार्पण समारोह में इसलिए शामिल नहीं हो सके क्योंकि उन्हें मंगलवार से ही शुरू हुए संसद से बजट सत्र में भाग लेना था.
हालांकि उन्होंने इस आरओबी का उद्घाटन हो जाने पर अपनी प्रसन्नता जाहिर करते हुए जुगसलाई, बागबेड़ा, हरहरगुट्टू एवं घाघीडीह सहित पूरे शहरवासियों को बधाई.

सांसद ने कहा कि वे जुगसलाई ओवरब्रिज के निर्माण के लिए अनवरत और अथक प्रयासरत रहे. चाहे इस संबंध में राज्य सरकार और रेल प्रशासन से समन्वय बनाने की बात हो अथवा रेल प्रशासन और पथ निर्माण विभाग के बीच में सामंजस्य स्थापित करने की उन्होंने पूरी शिद्दत के साथ इस काम को अंजाम दिया.
सांसद ने कहा चाहे राज्य सरकार के द्वारा रेल प्रशासन को भूमि के एवज में 33 करोड़ रुपये दिलाने की बात हो अथवा चूना भट्टा के विस्थापित लोगों के पुनर्वास का मामला हो, उन्होंने एक एक पहलू की निगरानी की.
विद्युत महतो ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के प्रति वे विशेष आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने हर पल इस कार्य में आगे बढ़कर सहयोग किया.


