
पत्र लिख कर अवैध वसूली को ‘स्वैच्छिक दान’ का रूप देने का लगाया आरोप
उदित वाणी, जमशेदपुर : टेल्को स्थित लिटिल फ्लॉवर स्कूल (एलएफएस) में नए नामांकन के नाम पर ‘बिल्डिंग फंड’ की कथित अवैध वसूली ने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है, जिसमें राष्ट्रीय बाल आयोग तक हस्तक्षेप की मांग की गई है.
शहर के प्रतिष्ठित स्कूल पर आरोप है कि उसने नए छात्रों के अभिभावकों से लगभग ₹12,000 की राशि ‘बिल्डिंग फंड’ के रूप में ली है. इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब जिला शिक्षा विभाग की रोक के बावजूद स्कूल प्रबंधन ने एक नया रास्ता निकालते हुए अभिभावकों से ‘कंसेंट फॉर्म’ यानी सहमति पत्र भरवाना शुरू कर दिया. भाजपा नेता और शिक्षा सत्याग्रह के संस्थापक अंकित आनंद ने इस कदम को स्कूल की सोची-समझी चालाकी करार दिया है. उनका कहना है कि प्रबंधन विभाग को गुमराह करने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाकर हस्ताक्षर करा रहा है, ताकि अवैध वसूली को ‘स्वैच्छिक दान’ का रूप दिया जा सके.
इस गंभीर विषय को लेकर अंकित आनंद ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग समेत राज्य के आला अधिकारियों को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है. शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून का उल्लंघन करते हुए स्कूल प्रबंधन दमनकारी नीति अपना रहा है. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इन कथित सहमति पत्रों को तत्काल शून्य घोषित किया जाए और अभिभावकों से ली गई पूरी राशि वापस कराई जाए.
विवाद गहराते देख अब स्कूल के पिछले 10 वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड के स्पेशल ऑडिट और प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है. अंकित आनंद ने आगाह किया है कि अगर प्रशासन ने इस मनमानी पर लगाम नहीं कसी, तो निजी स्कूलों की यह प्रवृत्ति भविष्य में शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक सिद्ध होगी.
