
उदित वाणी, जमशेदपुर: उपायुक् के निर्देशानुसार, उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में अनाबद्ध निधि, डीएमएफटी (DMFT), नीति आयोग फंड, एमपी-एमएलए लैड (MP-MLA LAD) और सीएसआर (CSR) मद से संचालित विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति की बारीकी से जांच की गई.
अधूरी योजनाओं पर कड़ा रुख: संवेदकों पर होगी कार्रवाई
बैठक के दौरान पुल-पुलिया, पहुंच पथ, पीसीसी रोड, पेयजल आपूर्ति, स्कूलों में अतिरिक्त कमरों और शौचालय निर्माण जैसे बुनियादी ढांचागत कार्यों की समीक्षा की गई. डीडीसी ने पाया कि कई योजनाएं निर्धारित समयावधि बीत जाने के बाद भी अपूर्ण हैं.
• निर्देश: अनावश्यक विलंब होने पर संबंधित अभियंता अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य पूर्ण कराएं.
• कार्रवाई: संवेदकों (Contractors) की लापरवाही पाए जाने पर उनके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है.
नीति आयोग फंड: 200 मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण
नीति आयोग से प्राप्त राशि के उपयोग की समीक्षा करते हुए डीडीसी ने 200 मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण कार्य में तेजी लाने को कहा.
• अन्य परियोजनाएं: जनजाति बहुल क्षेत्रों में आंगनबाड़ी सुदृढ़ीकरण, साल पत्ता प्लेट और कप उत्पादन यूनिट, ट्रांसजेंडर और महिलाओं के लिए फूड कार्ट, लाइब्रेरी सह रिसोर्स केंद्र और सरकारी स्कूलों में रसोई घर निर्माण कार्यों के भौतिक सत्यापन और भुगतान की समीक्षा की गई.
CSR और पेयजल: मध्य अप्रैल तक 100 चापाकल का लक्ष्य
गर्मी के मौसम को देखते हुए पेयजल संकट के समाधान पर विशेष जोर दिया गया. सीएसआर योजना के तहत 100 चापाकल अधिष्ठापन के कार्य को मध्य अप्रैल 2026 तक हर हाल में पूर्ण करने का निर्देश संबंधित कार्यकारी एजेंसी को दिया गया है ताकि नागरिकों को निर्बाध जलापूर्ति मिल सके.
DMFT और सांसद-विधायक निधि: भूमि विवादों का होगा निपटारा
डीएमएफटी मद से विशेषकर आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण में आ रहे भूमि विवादों को अंचल कार्यालय के समन्वय से सुलझाने का निर्देश दिया गया.
• निविदा प्रक्रिया: नई स्वीकृत योजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर संवेदकों के साथ एकरारनामा (Agreement) करने और कार्य शुरू करने को कहा गया.
• उपयोगिता प्रमाण पत्र: सांसद एवं विधायक निधि की योजनाओं में तेजी लाने और पूर्ण हो चुके कार्यों का ‘उपयोगिता प्रमाण पत्र’ (UC) जल्द सौंपने का निर्देश दिया गया.
बैठक में उपस्थित अधिकारी
समीक्षा बैठक में निदेशक एनइपी संतोष गर्ग, प्रभारी जिला योजना पदाधिकारी सुदिप्त राज, एनआरइपी, विशेष प्रमंडल, भवन निर्माण, जिला परिषद और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता व अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे.

