
उदित वाणी, जमशेदपुर: भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर द्वारा प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर 15वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन सोमवार को किया गया. दो दिवसीय इस संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के पुनरुत्थान तथा आधुनिक विज्ञान के साथ उनके समन्वय पर विचार-विमर्श करना है.
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ उद्घाटन सत्र
उद्घाटन सत्र डीजेएलएचसी (कक्ष संख्या 212) में आयोजित किया गया, जिसकी शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती वंदना के साथ हुई. इसके बाद अतिथियों का स्वागत किया गया. स्वागत भाषण भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र के अध्यक्ष एवं उप-निदेशक प्रो. राम विनय शर्मा ने प्रस्तुत किया.
भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेशन पर जोर
सत्र में प्रो. राकेश सहगल ने आधुनिक शिक्षा एवं अनुसंधान में भारतीय ज्ञान परंपरा को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया. वहीं भारतीय पारंपरिक ज्ञान विज्ञान समाज के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. देवी प्रसाद मिश्रा ने प्राचीन भारतीय प्रौद्योगिकी की वैज्ञानिकता, समृद्धि और स्थायित्व पर प्रकाश डाला.
सतत विकास के लिए परंपरा और तकनीक का समन्वय जरूरी
एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का पुनर्जीवन और उन्हें आधुनिक तकनीकी विकास से जोड़ना समय की आवश्यकता है. उन्होंने इसे सतत विकास और वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए महत्वपूर्ण बताया.
ज्ञान, विज्ञान और प्रज्ञान के संबंध पर चर्चा
डॉ. ओम प्रकाश पांडेय ने अपने वक्तव्य में ज्ञान, विज्ञान और प्रज्ञान के पारस्परिक संबंध को रेखांकित करते हुए भारतीय परंपराओं पर आधारित समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई.
प्रमुख विषयों पर हुआ मंथन
उद्घाटन सत्र में संगोष्ठी के प्रमुख विषयों पर भी चर्चा की गई, जिसमें प्राचीन भारतीय प्रौद्योगिकियों की स्थायित्व, प्रकृति-सम्मतता और समाज-केंद्रित दृष्टिकोण शामिल हैं. पारंपरिक सिंचाई प्रणालियों, धातुकर्म और सतत कृषि पद्धतियों जैसे उदाहरणों के माध्यम से भारत की समृद्ध तकनीकी विरासत को प्रस्तुत किया गया.
विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ देंगे व्याख्यान
दो दिवसीय संगोष्ठी के दौरान नृजातीय वनस्पति ज्ञान, पारंपरिक कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारतीय ज्ञान प्रणाली जैसे विषयों पर व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे. इसमें इंजीनियरिंग, कृषि, वास्तुकला, आयुर्वेद और खगोल विज्ञान जैसे विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञ भाग लेंगे.
धन्यवाद ज्ञापन के साथ सत्र का समापन
कार्यक्रम का समापन डॉ. जितेंद्र कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसके बाद वंदे मातरम् गाया गया. कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीष कुमार झा ने किया.

