
चक्रधरपुर रेल डिवीजन में ट्रेनों की ‘कछुआ चाल’ पर सियासत तेज, सांसद विद्युत वरण महतो ने रेलमंत्री से की मुलाकात
उदित वाणी, जमशेदपुर : चक्रधरपुर डिवीजन में ट्रेनों की कछुआ चाल ने अब शहर की सियासत में उबाल ला दिया है। पिछले दो वर्षों से ट्रेनों की लेटलतीफी झेल रहे यात्रियों के बहाने अब जमशेदपुर की धरती पर ‘सियासी जोर-आजमाइश’ की बिसात बिछ चुकी है। एक तरफ विधायक सरयू राय ने रेलवे के अड़ियल रुख के खिलाफ 7 अप्रैल को टाटानगर स्टेशन पर ‘महाधरना’ का बिगुल फूंक दिया है, तो दूसरी तरफ सांसद विद्युत वरण महतो दिल्ली से रेलमंत्री का आश्वासन पत्र लेकर लौट आए हैं। राजनीति के गलियारों में इसे सरयू के दांव पर सांसद की ‘नहले पर दहला’ वाली चाल के रूप में देखा जा रहा है।
विधायक सरयू राय ने रेलवे प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ट्रेनें चांडिल, चक्रधरपुर और घाटशिला तक समय पर आती हैं, लेकिन टाटानगर की दहलीज पर उन्हें घंटों रोक दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि महज 30 मिनट की दूरी तय करने में ट्रेनों को 3 से 5 घंटे क्यों लग रहे हैं? राय ने कहा है कि मालगाड़ियों से होने वाले मुनाफे का हिसाब तो रखता है, लेकिन यात्रियों की परेशानी की कीमत कौन चुकाएगा? रेल मंत्रालय इस पर ‘श्वेत पत्र’ जारी करे और बताए कि आखिर ट्रेनों को रोकने की क्या मजबूरी है।
महाधरने की सफलता के लिए जदयू कार्यकर्ताओं ने पूरी ताकत झोंक दी है। शहर के विभिन्न हिस्सों में जनसंपर्क अभियान और छोटी बैठकें शुरू हो चुकी हैं। दिलचस्प बात यह है कि सरयू राय ने इस धरने में घटक दल भाजपा को भी आमंत्रित किया है, जिससे सियासी समीकरण और पेचीदा हो गए हैं।
उधर जब शहर में धरने की तैयारियां जोर पकड़ रही थीं, ठीक उसी वक्त सांसद विद्युत वरण महतो दिल्ली में रेलमंत्री से मुलाकात कर रहे थे। सांसद ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर रेलमंत्री का पत्र साझा करते हुए बताया कि मंत्रालय ने चक्रधरपुर डिवीजन में ट्रेनों की देरी की जांच के आदेश दे दिए हैं। सांसद ने नई ट्रेनों (दिल्ली, जयपुर आदि) के परिचालन और बादामपहाड़ रेल मार्ग पर ओवरब्रिज निर्माण जैसी मांगों को भी पुरजोर तरीके से उठाया है।
सांसद की इस त्वरित पहल को राजनीतिक जानकार सरयू राय के धरने की धार कुंद करने की रणनीति मान रहे हैं। चर्चा है कि जब रेलमंत्री ने लिखित आश्वासन दे दिया है, तो क्या भाजपा नेता सरयू राय के धरने में शामिल होंगे? यह सवाल अब फिजां में तैर रहा है।
फिलहाल, चक्रधरपुर से लेकर घाटशिला तक ट्रेनों के लेट होने का सिलसिला जारी है। अब देखना यह है कि 7 अप्रैल की तारीख जमशेदपुर की राजनीति और रेल यात्रियों की किस्मत में क्या बदलाव लाती है।

