उदित वाणी, जमशेदपुर : भूटान की रॉयल सरकार और विश्व बैंक ने मंगलवार को 1,125 मेगावाट क्षमता वाले डोरजिलुंग जलविद्युत परियोजना के लिए कुल 515 मिलियन डॉलर के वित्तपोषण समझौतों पर हस्ताक्षर किए. यह परियोजना भूटान की कुल ऊर्जा उत्पादन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा होगी और सस्ती बिजली, स्वच्छ ऊर्जा निर्यात तथा नए रोजगार के माध्यम से आर्थिक विकास को गति देगी.
भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे ने कहा, “डोरजिलुंग जलविद्युत परियोजना हमारे 13वें पंचवर्षीय योजना का आधारशिला है। यह देश की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना होगी, जो पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित की जा रही है. यह स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करेगी, आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी और हमारे कार्बन-नेगेटिव लक्ष्य को मजबूत करेगी.”
परियोजना की मुख्य विशेषताएं:
1. कुरिचु नदी (पूर्वी भूटान) पर स्थित यह परियोजना सालाना 4,500 गीगावाट से अधिक स्वच्छ बिजली उत्पादन करेगी.
2. सर्दियों में भूटान की मौसमी ऊर्जा कमी को पूरा करेगी और ग्रीष्म व मानसून के मौसम में भारत को अतिरिक्त बिजली निर्यात करेगी.
3. भूटान के जीडीपी में 2.4 प्रतिशत की वृद्धि करने की उम्मीद है.
4. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन के साथ-साथ विनिर्माण, पर्यटन और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देगी.
5. प्रति वर्ष 33 लाख टन कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन कम करने में मदद करेगी.
अभिनव वित्तपोषण मॉडल
यह परियोजना भूटान और विश्व बैंक समूह के लिए अनोखी है. विश्व बैंक ने 300 मिलियन डॉलर आईडीए (जिसमें 150 मिलियन डॉलर अनुदान शामिल), 215 मिलियन डॉलर आईबीआरडी और आईएफसी के माध्यम से 300 मिलियन डॉलर तक की वित्तीय सहायता प्रदान की है.
परियोजना की कुल लागत 1.7 बिलियन डॉलर
परियोजना की कुल अनुमानित लागत 1.7 बिलियन डॉलर है. ड्रक ग्रीन पावर कारपोरेशन (60 फीसदी) और भारत की टाटा पावर (40 फीसदी) के संयुक्त उद्यम डोरजिलुंग जलविद्युत परियोजना द्वारा इसे विकसित किया जाएगा. इस मॉडल से भूटान पर संप्रभु ऋण का बोझ न्यूनतम रहेगा—सरकार की सीधी ऋण जिम्मेदारी केवल 150 मिलियन डॉलर है. 30 वर्षों में यह परियोजना करों, फ्री पावर और इक्विटी लाभांश के रूप में लगभग 4 बिलियन डॉलर का राजस्व उत्पन्न करेगी.
भारत-भूटान स्वच्छ ऊर्जा सहयोग
टाटा पावर के सीईओ एंड एमडी डॉ. प्रवीर सिन्हा ने कहा, “यह परियोजना भारत-भूटान स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को मजबूत करेगी. सालाना 4,500 गीगा वाट उत्पादन में से करीब 80 फीसदी बिजली भारत को मिलेगी, जो भारत की पीक डिमांड को पूरा करने में सहायक होगी.”विश्व बैंक के साउथ एशिया क्षेत्र के उपाध्यक्ष जोहान्स जुट्ट ने कहा कि यह परियोजना भूटान को महंगे ऊर्जा आयात कम करने और निर्यात से आय अर्जित करने में मदद करेगी, जबकि दक्षिण एशिया में कार्बन उत्सर्जन घटाने और ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने में योगदान देगी. भूटान के वित्त मंत्री एच.ई. ल्योनपो लेके डोरजी और ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर दाशो छेवांग रिनजिन ने भी परियोजना को भूटान के ऊर्जा क्षेत्र में परिवर्तनकारी कदम बताया.


