
उदित वाणी, जमशेदपुर: 405 दिनों की देरी के बाद टाटा कमिंस में ग्रेड समझौता होने के आसार है. कंपनी प्रबंधन के शीर्ष अधिकारी पुणे से 11 मई को शहर पहुंच रहे हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि 12 मई को ग्रेड समझौता हो जाएगा.
एक साल पहले सत्ता में आई यूनियन की 365 दिनों की नौटंकी के बाद कर्मचारियों को चार साल का ग्रेड मिलने जा रहा है. सुविधाओं के नाम पर प्रबंधन यूनियन को जरूर कुछ लॉलीपाप थमा सकता है, जिसकी संभावना है. पिछले साल मई माह में सत्ता में आने के बाद यूनियन की नई टीम ने बेहतर ग्रेड कराने का वादा किया था.
ग्रेड में सबसे ज्यादा जिच ग्रेड की मियाद को लेकर था. प्रबंधन का शुरू से ही स्टैंड था कि ग्रेड इस साल तीन साल की बजाय चार साल का हो. यह बात अलग है कि यूनियन एक साल से ग्रेड की मियाद को लेकर वार्ता के नाम पर नौटंकी करती रही, मगर कंपनी के कर्मचारियों को ग्रेड में देरी का कोई लाभ नहीं मिला.
पहले से तय था
वैसे चार साल के ग्रेड की पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी, क्योंकि टाटा मोटर्स ने भी चार साल का ग्रेड कर दिया है. यही नहीं शहर की और कई कंपनियों में भी ग्रेड की मियाद को तीन साल से बढ़ाया गया है.
एक कर्मचारी का कहना है कि जब प्रबंधन ने साफ कर दिया कि ग्रेड चार साल का होगा, तो फिर इतनी देरी का कोई फायदा नहीं था. यूनियन को दूसरी सुविधाओं पर बात कर आगे बढ़ना चाहिए था. मगर यूनियन, कर्मचारियों को बेवकूफ बनाती रही. इस टीम ने जोर शोर से प्रचार किया कि इस बार का ग्रेड बेहतर कराएंगे और कर्मचारियों को ज्यादा सुविधाएं दिलाएंगे.
नई यूनियन के जोश और उत्साह को देखते हुए लगा कि बोनस के पहले ग्रेड समझौता हो जाएगा. लेकिन बोनस तो हो गया, ग्रेड समझौता नहीं हुआ. ग्रेड की गाड़ी लेट होती गई. एक माह, दो माह से होते हुए साल लग गये. उल्लेखनीय है कि टाटा कमिंस का ग्रेड एक अप्रैल 2022 से ही लंबित है.

