उदित वाणी, रांची : झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ जैसे गंभीर विषय पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा मुलाकात के लिए समय नहीं दिए जाने को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान श्री मरांडी ने कहा कि पार्टी मुख्यमंत्री से मिलकर राज्य में विशेष सत्र बुलाने और सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजने का आग्रह करना चाहती थी, लेकिन लगातार प्रयास के बाद भी समय नहीं मिला.
मुलाकात के प्रयासों पर मुख्यमंत्री की चुप्पी
मरांडी ने जानकारी दी कि पार्टी के महामंत्री अमर कुमार बाउरी द्वारा 30 अप्रैल से ही मुख्यमंत्री से समय लेने का प्रयास किया जा रहा था. लक्ष्य था कि 3 मई को मुलाकात हो सके, लेकिन स्पष्ट उत्तर न मिलने के कारण भाजपा को अब पत्र का सहारा लेना पड़ा है. उन्होंने कहा कि विषय वस्तु स्पष्ट करने के बावजूद मुख्यमंत्री ने समय देना मुनासिब नहीं समझा.
झारखंड में सीटों का समीकरण: 81 से 121 हो सकती है विधानसभा सीटें
बाबूलाल मरांडी ने अधिनियम के महत्व को समझाते हुए कहा कि इसके लागू होने से झारखंड में लोकसभा की सीटें 14 से बढ़कर 21 हो जातीं (7 महिलाओं के लिए आरक्षित), और विधानसभा की सीटें 81 से बढ़कर 121 हो जातीं (41 महिलाओं के लिए आरक्षित). उन्होंने कहा कि राज्य की पिछली सरकारों ने भी विधानसभा सीटें बढ़ाने का संकल्प भेजा था, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस बिल के विरोध में मतदान किया, जो निराशाजनक है.
विशेष सत्र बुलाने की मांग
भाजपा की योजना मुख्यमंत्री से राज्यपाल की सहमति से एक विशेष सत्र बुलाने का आग्रह करने की थी. इसके माध्यम से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने की तैयारी थी ताकि इस बिल को दोबारा लाया जा सके और महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके. प्रेस वार्ता के अंत में नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र भी साझा किया. इस अवसर पर प्रदेश मीडिया सह प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह और प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज भी उपस्थित रहे.


