
उदित वाणी, गुवा : टाटा स्टील की विजय-2 लौह अयस्क खदान 18 अगस्त 2025 से लीज नवीनीकरण में अड़चन के कारण पूरी तरह बंद है, जिससे नोवामुंडी, बराईबुरु और गुवा क्षेत्र में आर्थिक मंदी व्याप्त हो गई है. खदान बंद होने से हजारों मजदूर, ट्रक मालिक, ड्राइवर और खलासी बेरोजगार हो गए हैं, जिनकी आजीविका पर गहरा प्रभाव पड़ा है.
समाजसेवी अरविंद चौरसिया ने बताया कि खदान बंद होने से पूरे सारंडा क्षेत्र में भुखमरी फैल गई है और लोग रोजगार के लिए अपने गांव छोड़कर पलायन कर रहे हैं. उन्होंने वर्तमान झारखंड और केंद्र सरकार से इस समस्या को गंभीरता से देखकर शीघ्र समाधान की अपील की है.
मजदूरों ने कहा है कि जब तक खदान की लीज नवीनीकरण प्रक्रिया पूरी नहीं होती, कंपनी प्रबंधन और वेंडर आर्थिक सहायता दें ताकि परिवारों का चूल्हा जला रहे. स्थानीय दुकानदारों और छोटे व्यापारियों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा है.
खदान की बंदी से क्षेत्र में बेरोजगारी, आर्थिक संकट और सामाजिक विघटन की आशंका बढ़ गई है. मजदूर संगठन और स्थानीय नेतृत्व सरकार से मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी कर खदान को पुनः चालू कराया जाए.
इस बीच, मजदूर यूनियन द्वारा चेतावनी दी गई है कि यदि दुर्गा पूजा से पहले खदान नहीं खुली तो नोवामुंडी प्रखंड कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया जाएगा. इस मामले में स्थानीय नेताओं ने भी हस्तक्षेप करते हुए जल्द समाधान की उम्मीद जताई है.
विजय-2 खदान टाटा स्टील के लिए महत्वपूर्ण लौह अयस्क स्रोत रही है और इसके बंद होने से कंपनी के कच्चे माल की आपूर्ति पर भी अल्पकालिक असर पड़ सकता है. प्रशासनिक स्तर पर खदान की सुरक्षा और पर्यावरणीय दायित्वों का निर्वाह करना टाटा स्टील की जिम्मेदारी बनी हुई है.

