उदित वाणी, जमशेदपुर : जमशेदपुर के एमजीएम (MGM) अस्पताल के चिकित्सकों ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता का परिचय देते हुए जहरीले सांप के डसने से गंभीर रूप से बीमार हुए दो बच्चों को नई जिंदगी दी है. एंटी स्नेक वेनम की भारी खुराक और विशेषज्ञों की निगरानी में चले इलाज के बाद दोनों बच्चों को स्वस्थ होने पर सोमवार को छुट्टी दे दी गई.
शिशु रोग विभाग की टीम ने संभाली कमान
एमजीएम अस्पताल के शिशु रोग विभाग के डॉक्टर राघवेंद्र ने बताया कि दोनों बच्चों का इलाज विभागाध्यक्ष डॉक्टर रविंद्र कुमार की यूनिट में किया गया. इस चुनौतीपूर्ण इलाज में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने लगातार निगरानी रखी, जिससे बच्चों की हालत में सुधार संभव हो सका.
केस 1: वेंटिलेटर पर रही 12 वर्षीय भारती सबर
पहला मामला डुमरिया का है, जहाँ 23 अप्रैल की रात घर में सोते समय 12 वर्षीय भारती सबर को जहरीले सांप ने डस लिया था. बेहोशी की हालत में उसे पहले सीएचसी डुमरिया ले जाया गया, जहाँ से उसे एमजीएम अस्पताल रेफर किया गया. अस्पताल में भारती को एंटी स्नेक वेनम सीरम की 40 खुराक दी गई और स्थिति गंभीर होने के कारण कुछ समय के लिए वेंटिलेटर पर रखा गया. इलाज के बाद सुधार होने पर 28 अप्रैल को उसे छुट्टी मिली.
केस 2: 10 वर्षीय रोहन मंडल को दी गई 50 सूई
दूसरा मामला कोवाली का है, जहाँ 27 अप्रैल को 10 वर्षीय रोहन मंडल सर्पदंश का शिकार हुआ. उसे अत्यंत गंभीर स्थिति में एमजीएम में भर्ती कराया गया. रोहन को बचाने के लिए डॉक्टरों ने 50 एंटी स्नेक वेनम की सूई दी और उसे भी वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया. डॉक्टरों के अथक प्रयास से रोहन पूरी तरह स्वस्थ हुआ और 4 मई को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.
समय पर उपचार रहा जान बचाने में निर्णायक
डॉक्टर राघवेंद्र के अनुसार, इन दोनों ही मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचना बच्चों की जान बचाने में सबसे महत्वपूर्ण साबित हुआ. इस सफल उपचार टीम में डॉक्टर सिद्धार्थ, डॉक्टर तान्या और डॉक्टर अमाल सहित पूरी टीम की अहम भूमिका रही.


