
उदित वाणी,सरायकेला/आदित्यपुर: सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र (Fake Birth Certificate Scam) बनाने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है. गुरुवार को उपनगर आयुक्त पारुल सिंह के नेतृत्व में हुई औचक जांच के दौरान शहर के एक निजी नर्सिंग होम से फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र जारी करने की पुष्टि हुई है. इस कार्रवाई के बाद से क्षेत्र के अन्य निजी अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया है.
डेढ़ दर्जन फर्जी मामलों की पुष्टि, दो से तीन हजार में होता था सौदा
उपनगर आयुक्त पारुल सिंह ने बताया कि उन्हें लंबे समय से निजी अस्पतालों द्वारा गलत तरीके से जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की शिकायतें मिल रही थीं. इसी आधार पर प्रतिष्ठित महिला चिकित्सक डॉ. वीणा सिंह के “न्यू लाइफ” नर्सिंग होम में जांच की गई. जांच के दौरान लगभग डेढ़ दर्जन (18) ऐसे मामले सामने आए, जहाँ फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार किए गए थे.
वसूली: जानकारी के अनुसार, एक फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के एवज में दो से तीन हजार रुपये तक वसूले जा रहे थे.
उद्देश्य: आशंका जताई जा रही है कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के पीछे स्थानीयता का लाभ लेना या सरकारी योजनाओं का गलत फायदा उठाना मुख्य उद्देश्य हो सकता है.
डॉ. वीणा सिंह ने स्वीकारी गलती, प्रमाण पत्र होंगे निरस्त
मामले में घिरने के बाद डॉ. वीणा सिंह ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है. उन्होंने कहा, “मुझसे गलती हुई है. कुछ मरीज पुराने केस का हवाला देकर दबाव बनाते थे, जिसके आधार पर गलत तरीके से प्रमाण पत्र जारी हो गए. यह पूरी तरह गलत है.” उन्होंने बताया कि उनके द्वारा जारी किए गए सभी संदिग्ध प्रमाण पत्रों को निरस्त (Cancel) किया जा रहा है और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न होने का आश्वासन दिया है.
जांच के दायरे में कई अन्य बड़े नाम
उपनगर आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल एक नर्सिंग होम तक सीमित नहीं रहेगी. जांच में यह संकेत मिले हैं कि इस खेल में कई अन्य चिकित्सक और अस्पताल भी शामिल हो सकते हैं. नगर निगम प्रशासन अब सभी निजी नर्सिंग होम द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों की सूक्ष्मता से जांच कर रहा है.
सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी
पारुल सिंह ने कहा कि फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. नगर निगम प्रशासन फिलहाल पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटा है. यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच की आंच किन-किन रसूखदार डॉक्टरों और अस्पतालों तक पहुँचती है.

