
उदित वाणी, जमशेदपुर : झारखंड के सरकारी विद्यालयों में बुधवार से नए शैक्षणिक सत्र का औपचारिक शंखनाद होने जा रहा है, लेकिन इस नए उत्साह के साथ शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के लिए कड़े दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं. राज्य के शैक्षणिक ढांचे को व्यवस्थित और परिणामोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से झारखंड शिक्षा परियोजना के निदेशक शशि रंजन ने स्पष्ट किया है कि इस सत्र में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होगी. नए सत्र की शुरुआत के साथ ही सभी शिक्षकों और पारा शिक्षकों के लिए अपनी-अपनी कक्षाओं और विषयों के अनुसार ‘पाठ्य-योजना’ (लेसन प्लान ) तैयार करना अनिवार्य कर दिया गया है. जो शिक्षक इस प्रक्रिया में कोताही बरतेंगे या समय सीमा के भीतर अपनी योजना प्रस्तुत नहीं करेंगे, उनके मई माह के वेतन और मानदेय के भुगतान पर रोक लगा दी जाएगी. इस संबंध में राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला शिक्षा अधीक्षकों को सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं कि वे शिक्षकों की जवाबदेही सुनिश्चित करें.
शिक्षा विभाग की इस नई रणनीति के केंद्र में केवल प्रशासनिक अनुशासन ही नहीं है, बल्कि छात्रों के बुनियादी स्तर में सुधार करना भी है. नए सत्र के शुरुआती दो महीनों यानी अप्रैल और मई को ‘आधारभूत आरंभिक कक्षाओं’ के आयोजन के लिए समर्पित किया गया है. इसके तहत शिक्षकों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे सबसे पहले अपनी कक्षा के विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान का सटीक आकलन करें. जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, शिक्षकों को अपनी पाठ्य-योजना तैयार कर उसे विद्यालय के प्रधानाध्यापक या संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी से हस्ताक्षरित कराना होगा, तभी उसे कक्षा में लागू माना जाएगा. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि शिक्षण की प्रक्रिया महज औपचारिकता न रहकर एक सुनियोजित ढंग से आगे बढ़ सके.
छात्रों के शैक्षणिक स्तर को सुधारने के लिए विभाग ने ‘बेसलाइन असेसमेंट’ पर विशेष जोर दिया है. चार अप्रैल तक सभी विद्यालयों को विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान के आधार पर उनका आकलन कर उन्हें ए, बी, सी और डी ग्रेड में वर्गीकृत करना होगा. विशेषकर भाषा के विषयों जैसे हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और उर्दू में छात्रों के अक्षर ज्ञान, व्याकरण की समझ और उनके पढ़ने-लिखने के कौशल की बारीकी से जांच की जाएगी. इस प्रारंभिक मूल्यांकन के बाद, छात्रों को उनके सीखने के स्तर के अनुसार विभिन्न समूहों में बांटा जाएगा. इन समूहों के लिए प्रतिदिन सभी विषयों की एक विशेष घंटी का नियमित संचालन किया जाएगा, ताकि कमजोर छात्रों को मुख्यधारा में लाया जा सके. सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नया सत्र शुरू होते ही हर बच्चा अपनी क्षमता के अनुरूप प्रगति कर सके और शिक्षक अपनी जिम्मेदारी के प्रति सजग रहें.

