
उदित वाणी, रांची : झारखंड की राजनीति में एक बड़ी हलचल के संकेत मिल रहे हैं. सियासी गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन को इस बार राज्यसभा भेज सकते हैं.
बताया जा रहा है कि झामुमो नेतृत्व उन्हें केंद्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका देना चाहता है, ताकि वह उच्च सदन में झारखंड के प्रमुख मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा सकें. राजनीतिक जानकारों के अनुसार, कम समय में ही सक्रिय राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाली कल्पना सोरेन को पार्टी राष्ट्रीय मंच पर आगे बढ़ाना चाहती है. उच्च सदन में पहुंचकर वे आदिवासी अधिकार, भूमि, खनिज संपदा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठा सकती हैं.
मई में दो सीटों पर चुनाव संभावित, समीकरण महागठबंधन के पक्ष में
इसे झारखंड मुक्ति मोर्चा की राष्ट्रीय स्तर पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है. गौरतलब है कि झारखंड से राज्यसभा की दो सीटें जल्द खाली हो रही हैं. एक सीट शिबू सोरेन के निधन के बाद रिक्त हुई है, जबकि दूसरी सीट भाजपा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल 21 जून को समाप्त होने के कारण खाली होगी.
संभावना है कि इन सीटों के लिए मई माह में चुनाव कराया जा सकता है.
विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार सत्ताधारी महागठबंधन के पास 56 विधायक हैं, जिनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा माले के 2 विधायक शामिल हैं.
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है. ऐसे में महागठबंधन की स्थिति मजबूत मानी जा रही है. हालांकि दूसरी सीट को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला होने की संभावना जताई जा रही है, जबकि झामुमो दोनों सीटों पर दावा कर रही है.

