
उदित वाणी, जमशेदपुर : अंकिता कुमारी और उनकी 21 साथियों के लिए शनिवार सिर्फ़ एक आम मैच का दिन नहीं है. यह वह सफ़र है जिसका उन्हें बेसब्री से इंतज़ार था. लड़कियां, अपने कोचों के साथ रांची से जमशेदपुर के लिए साढ़े तीन घंटे की सड़क यात्रा पर निकलीं, सिर्फ़ एक स्पष्ट उद्देश्य के साथ – जमशेदपुर सुपर लीग में प्रतिस्पर्धी फुटबॉल खेलने के लिए. महिला फुटबॉलरों के लिए संगठित मैच अनुभव अभी भी सीमित है, ख़ासकर बड़े केंद्रों के बाहर. ऐसे परिदृश्य में जमशेदपुर सुपर लीग एक दुर्लभ और मूल्यवान मंच बन गई है. इन युवा खिलाड़ियों के लिए यह टूर्नामेंट वह चीज़ प्रदान करता है, जो घर में अक्सर नहीं मिलती. असली मैच की स्थितियां, संरचित प्रतियोगिता और लीग वातावरण में खेलने का अहसास.
व्यर्थ नहीं गई यात्रा
यह यात्रा व्यर्थ नहीं गई. रांची की टीम को तीन ग्रुप्स – ब्लू, येलो और डायमंड दिवास – में बांटा गया है, जो गर्ल्स डिवीजन में अन्य 17 टीमों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रही हैं, जिससे इस कैटेगरी में कुल 20 टीमें हो गई हैं. कुल मिलाकर समूह की 22 खिलाड़ियां लीग का हिस्सा हैं, जिनमें से ज़्यादातर 17 वर्ष से कम उम्र की हैं और कई ने ज़िला तथा राज्य स्तर पर झारखंड का प्रतिनिधित्व किया है.अंकिता कुमारी ने लंबी यात्रा के पीछे की प्रेरणा को कुछ इस तरह व्यक्त किया: “हमें फुटबॉल खेलने का जुनून है, लेकिन रांची में प्रतिस्पर्धी मैच खेलने के ज़्यादा अवसर नहीं मिलते. जब हमें जमशेदपुर सुपर लीग के बारे में पता चला, तो हम जान गए थे कि हमें आना ही होगा और खेलना ही होगा.”उनकी साथी उर्वशी कुमारी ने इस पहल के बड़े महत्व को रेखांकित किया: “जमशेदपुर एफसी लड़कियों की लीग आयोजित करके बहुत अच्छा काम कर रहा है. आम तौर पर ज़्यादातर टूर्नामेंट सिर्फ़ लड़कों के लिए होते हैं. यह पहल हम जैसी लड़कियों को सही मंच देती है. जब खेलने के लिए मैच हो, तो यात्रा बहुत छोटी लगती है.” उन्होंने उस उत्साह की ओर इशारा किया जो यात्रा की शारीरिक थकान पर भारी पड़ जाता है.

