
उदित वाणी, झारखंड : भारतीय रेल ने पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत देशभर में रेलवे नेटवर्क के बड़े विस्तार को मंजूरी दी है. इस व्यापक योजना में झारखंड को प्रमुख फोकस राज्यों में शामिल किया गया है. वित्त वर्ष 2025-26 में नई लाइनों, दोहरीकरण, मल्टी-ट्रैकिंग और अन्य कार्यों से जुड़ी 100 रेलवे परियोजनियों को स्वीकृति मिली है. इसका उद्देश्य देश के अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी बढ़ाना, वंचित क्षेत्रों को जोड़ना और राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करना है.
झारखंड को मिला प्रमुख फोकस
मंजूर 100 परियोजनियों में झारखंड को 10 परियोजनियों के साथ प्रमुख राज्यों में शामिल किया गया है. महाराष्ट्र में 17, बिहार में 11, झारखंड में 10 और मध्य प्रदेश में 9 परियोजनियां स्वीकृत हुई हैं. भारतीय रेल के अनुसार, झारखंड की भूमिका माल ढुलाई गलियारों, औद्योगिक कनेक्टिविटी और यात्रियों की बढ़ती मांग के लिहाज से बेहद अहम है. राज्य में इन परियोजनियों से यात्री और माल ढुलाई सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है.
रेल विस्तार में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
इन 100 परियोजनियों में कुल 1.53 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया गया है. ये परियोजनियां 6000 किलोमीटर से अधिक लंबे रेलवे नेटवर्क को कवर करेंगी. यह रेलवे विस्तार के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है.
वित्त वर्ष 2024-25 में 72,869 करोड़ रुपए की लागत वाली 64 परियोजनियों को मंजूरी मिली थी, जिनकी लंबाई 2800 किलोमीटर से अधिक थी. इसकी तुलना में इस बार परियोजनियों की संख्या में 56 प्रतिशत, रूट कवरेज में 114 प्रतिशत से अधिक और वित्तीय प्रतिबद्धता में 110 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है.
किन कार्यों को मिली मंजूरी
स्वीकृत परियोजनियों में नई रेलवे लाइनें, दोहरीकरण, मल्टी-ट्रैकिंग, बाईपास लाइनें, फ्लाईओवर और कॉर्ड लाइनें शामिल हैं. इनका मुख्य उद्देश्य भीड़भाड़ वाले मार्गों पर दबाव कम करना, ट्रेनों की समयबद्धता सुधारना, यात्रियों के सफर को आसान बनाना और अब तक कम सुविधाओं वाले क्षेत्रों तक रेल पहुंचाना है.
भारतीय रेल का कहना है कि इन परियोजनियों से पूरे नेटवर्क की परिचालन दक्षता बढ़ेगी और यात्रा समय में कमी आएगी.
झारखंड के दूरदराज इलाकों को मिलेगा लाभ
पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत इन परियोजनियों का फोकस केवल बुनियादी ढांचा निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक बदलाव भी इसका अहम हिस्सा है. जनजातीय और दूरदराज क्षेत्रों तक रेल कनेक्टिविटी पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया गया है.
रेल मंत्रालय के अनुसार, झारखंड और ओडिशा में कई रेल गलियारों के विस्तार से बाजार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान होगी. इससे वंचित आबादी को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी.
माल ढुलाई और उद्योग को मिलेगी मजबूती
झारखंड जैसे राज्यों में इन परियोजनियों से माल ढुलाई गलियारों को मजबूती मिलेगी, औद्योगिक संपर्क बेहतर होगा और यात्रियों की आवाजाही सुगम बनेगी. रेलवे के अनुसार, झारखंड भारत के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की रीढ़ वाले राज्यों में शामिल है. यहां बेहतर रेल कनेक्टिविटी का असर राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
मिशन 3000 के तहत बढ़ेगी क्षमता
ये परियोजनियां ‘मिशन 3000 मीट्रिक टन’ पहल के अनुरूप भी हैं, जिसका मकसद माल ढुलाई क्षमता बढ़ाना है. पोर्टफोलियो में ऊर्जा कॉरिडोर परियोजनियां प्रमुख हैं, जो कोयला और खनिजों की तेज ढुलाई सुनिश्चित करेंगी. हाई डेंसिटी नेटवर्क परियोजनियां भीड़भाड़ कम करेंगी, जबकि रेल सागर कॉरिडोर से पोर्ट कनेक्टिविटी मजबूत होगी.
बड़े निवेश से रोजगार की उम्मीद
रेलवे के इस बड़े निवेश से देशभर में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन, स्टील और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ने और लॉजिस्टिक्स लागत घटने की उम्मीद है. रेलवे का मानना है कि इन परियोजनियों से उसकी क्षमता बढ़ेगी, सेवा वितरण बेहतर होगा और देश की आर्थिक वृद्धि को नई रफ्तार मिलेगी.

