
उदित वाणी, रामगढ़: नारी शक्ति ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों तो ग्रामीण महिलाएं भी वैश्विक स्तर पर बदलाव ला सकती हैं। रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड अंतर्गत संग्रामपुर पंचायत राज्य की पहली ऐसी पंचायत बन गई है, जिसे कार्बन क्रेडिट हासिल हुआ है। इस पंचायत के बाबलोंग और बेदिया जारा गांव की महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी मिसाल पेश की है।
उन्नत चूल्हों से बदली तकदीर और तस्वीर
संग्रामपुर पंचायत की इस सफलता के पीछे ‘उन्नत चूल्हों’ का व्यापक उपयोग है। सरकार और स्वयंसेवी संस्था “सिधा” के संयुक्त प्रयास से शुरू हुई इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं की जीवनशैली को पूरी तरह बदल दिया है। इन चूल्हों की विशेषता यह है कि इनमें लकड़ी की खपत बहुत कम होती है और खाना भी कम समय में तैयार हो जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनसे धुआं न के बराबर निकलता है, जिससे पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन कम हुआ है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को लाभ
लाभुक पार्वती देवी और अनिता देवी ने बताया कि पहले खाना बनाने के लिए जंगलों से भारी-भरकम लकड़ियां लानी पड़ती थीं, लेकिन अब कम लकड़ी में ही काम चल जाता है। धुआं कम होने से महिलाओं को सांस और आंखों से जुड़ी बीमारियों से राहत मिली है। रामगढ़ के उपायुक्त फैज अक अहमद मुमताज ने इस उपलब्धि को जिले के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि यह मॉडल पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए क्रांतिकारी है।
जंगलों पर कम हुआ दबाव
पंचायत के मुखिया हेमंत कुमार और संस्था प्रमुख सीताराम मुंडा ने कहा कि इस पहल से न केवल महिलाओं की मेहनत घटी है, बल्कि जंगलों पर पड़ने वाला दबाव भी कम हुआ है। कार्बन उत्सर्जन कम करने के इस सफल मॉडल को अब पूरे क्षेत्र में विस्तार देने की योजना है।

