नई दिल्ली, (आईएएनएस) :अमेरिका-इजरायल और ईरान में जारी जंग के बीच देश के कई शहरों में एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी की खबरों को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है और इस मुद्दे पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की सांसद महुआ माजी ने कहा कि रांची में भी एलपीजी सिलेंडर और पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि लोग आने वाले समय को लेकर चिंतित हैं। सरकार का कहना है कि देश में लगभग एक महीने का गैस स्टॉक मौजूद है, लेकिन युद्ध कब तक चलेगा इसकी कोई गारंटी नहीं है। ऐसे में सरकार को अपनी नीतियों और रणनीति को स्पष्ट करना चाहिए।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह एक बेहद गंभीर स्थिति है। एलपीजी की उपलब्धता कम हो रही है और इसकी कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। उनके मुताबिक अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में समस्या और बढ़ सकती है। लोगों को परेशानी को समझना चाहिए।
वहीं कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने अमेरिका-इजरायल और ईरान में चल रही लड़ाई को इस संकट की बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बाद जिस तरह से अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया और पूरे इलाके में अस्थिरता बढ़ी, उससे पहले ही यह अंदेशा हो गया था कि गैस, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि सरकार ने हाल ही में एलपीजी सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी कर दी है। मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में गैस की कमी की खबरें सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि इसी वजह से विपक्ष ने संसद में स्थगन प्रस्ताव दिया था ताकि इस मुद्दे पर तुरंत चर्चा हो सके। उनका कहना है कि यदि युद्ध लंबा चला तो इसका भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
इसी मुद्दे पर कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कर्नाटक, बेंगलुरु, पुणे और चेन्नई के होटल मालिकों ने बताया है कि एलपीजी की कमी के कारण उन्हें अपने होटल बंद करने की नौबत आ सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार के सामान्य बयानों के बजाय संसद में ठोस चर्चा और स्पष्ट योजना की जरूरत है।
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि मुंबई जैसे बड़े शहरों में गरीब परिवारों के लिए गैस के बिना गुजारा करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने आशंका जताई कि इस स्थिति का फायदा उठाकर कुछ लोग ब्लैक मार्केटिंग भी कर सकते हैं। इसके अलावा, छोटे होटल और रोज होटल में खाना खाने वाले गरीब लोगों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा।
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