
उदित वाणी, जमशेदपुर: भारतीय रेलवे की प्रीमियम सेवाओं में शुमार पटना-टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस एक बार फिर अपनी खानपान व्यवस्था (Catering Service) को लेकर विवादों के घेरे में . हाल ही में एक यात्री ने ट्रेन में परोसे गए भोजन की खराब गुणवत्ता और स्टाफ की लापरवाही को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रेल मंत्रालय से आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई .
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को पटना से टाटानगर के बीच सफर कर रहे यात्री वरुण कुमार ने ट्रेन में शाकाहारी भोजन का विकल्प चुना था। वरुण का आरोप है कि यात्रा के दौरान उन्हें पहले तो भोजन देने में देरी हुई और बाद में स्टाफ ने बताया कि नियमित भोजन (Regular Meal) खत्म हो चुका . इसके विकल्प के रूप में उन्हें एक प्रसिद्ध ब्रांड का “रेडी-टू-ईट” (Ready-to-Eat) पैकेट थमा दिया गया।
बिना गर्म किए परोसा गया कच्चा खाना
यात्री वरुण कुमार ने अपनी शिकायत में बताया कि जो पैकेट उन्हें दिया गया था, उसे नियमानुसार गर्म करके परोसा जाना चाहिए था। हालांकि, ट्रेन स्टाफ ने बिना गर्म किए ही उन्हें ठंडा पैकेट दे दिया। यात्री का दावा है कि खाना पूरी तरह ठंडा था और चावल ठीक से पके नहीं थे, जिसके कारण उसे खाना लगभग नामुमकिन था। इसे यात्रियों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ बताते हुए उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
परेशान यात्री ने इस घटना की तस्वीरें और अपना अनुभव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया। उन्होंने रेल मंत्रालय को टैग करते हुए लिखा कि प्रीमियम ट्रेन में इस तरह की घटिया सेवा स्वीकार्य नहीं . वरुण कुमार के अनुसार, यात्री वंदे भारत जैसी ट्रेनों में अधिक किराया सिर्फ बेहतर सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण अनुभव के लिए देते हैं, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लग रही .
पहले भी हो चुकी है लापरवाही
यह पहली बार नहीं है जब पटना-टाटानगर वंदे भारत एक्सप्रेस की कैटरिंग पर सवाल उठे हों। इससे पहले 15 मार्च को भी इसी ट्रेन में खराब दही परोसने की शिकायत सामने आई थी। उस समय रेलवे ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित कैटरिंग एजेंसी पर जुर्माना लगाया था। हालांकि, बार-बार हो रही इन घटनाओं ने रेलवे की निगरानी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया .
सख्त निगरानी की मांग
ताजा विवाद के बाद यात्रियों के बीच खासा रोष . आम यात्रियों का मानना है कि केवल जुर्माने की कार्रवाई पर्याप्त नहीं . रेलवे को खानपान की गुणवत्ता पर निरंतर निगरानी और सख्त मानक (Standard) तय करने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल, इस मामले में रेलवे प्रशासन की ओर से विस्तृत जांच की प्रतीक्षा की जा रही .

