उदित वाणी, जमशेदपुर: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जमशेदपुर के DJLHC स्थित कक्ष संख्या 212 में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने के रोडमैप पर मंथन किया।
दिग्गज वैज्ञानिकों की उपस्थिति और संबोधन
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. वी. के. सारस्वत रहे। वहीं, (Sona Devi University) के संस्थापक एवं कुलाधिपति श्री प्रभाकर सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ, जिसके बाद प्रो. प्रभा चंद ने स्वागत भाषण दिया।
विकसित भारत 2047 का लक्ष्य और एनआईटी की भूमिका
एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने अपने संबोधन में राष्ट्र निर्माण के लिए स्वदेशी तकनीकी क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अनुसंधान, स्टार्टअप इकोसिस्टम और उद्योग-अकादमिक सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने एनआईटी जैसे संस्थानों को तकनीकी आत्मनिर्भरता का आधार बताया।
डीप टेक संप्रभुता: भविष्य की रणनीतिक ताकत
डॉ. वी. के. सारस्वत ने “Techno-Strategic Powerhouse India: Architecting Deep Tech Sovereignty for Viksit Bharat @ 2047” विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:
स्वतंत्रता के 100 वर्ष: 2047 तक भारत को एक वैश्विक नेतृत्वकारी राष्ट्र बनाना।
प्रमुख स्तंभ: सशक्त नागरिक, उन्नत विनिर्माण और नवाचार आधारित विकास।
रणनीतिक क्षेत्र: रक्षा प्रणाली, सेमीकंडक्टर, एआई (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और विमानन में आत्मनिर्भरता।
डीप टेक का महत्व: जटिल वैश्विक चुनौतियों के समाधान और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक खोजों पर आधारित ‘डीप टेक’ को अपनाना अनिवार्य है।
शिक्षा और कौशल विकास पर जोर
विशिष्ट अतिथि श्री प्रभाकर सिंह ने कहा कि नवाचार आधारित शिक्षा और कौशल विकास ही तकनीकी रूप से सशक्त भारत की नींव है। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने iTBI केंद्र में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जहाँ विभिन्न नवाचारों को प्रदर्शित किया गया था।


