उदित वाणी, जमशेदपुर: टाटानगर रेलवे स्टेशन के कायाकल्प (री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट) को लेकर रेलवे और सामाजिक संस्थाओं के बीच विवाद खड़ा हो गया है। रेलवे प्रशासन ने बागबेड़ा और कीताडीह क्षेत्र की पाँच प्रमुख सामाजिक संस्थाओं को नोटिस थमाकर 15 दिनों के भीतर जमीन खाली करने का अल्टीमेटम दिया है। इस फैसले के बाद से शहर के सामाजिक और राजनीतिक हलकों में तीखा रोष देखा जा रहा है।
इन 5 प्रमुख संस्थाओं पर गिरी गाज
रेलवे द्वारा जारी नोटिस की जद में बागबेड़ा रोड नंबर-1 और किटाडीह स्थित निम्नलिखित संस्थान आए हैं:
परशुराम समाज भवन
अनुराग नारायण शिक्षा सेवा संस्थान
श्रीकृष्ण मेमोरियल संघ
मिथिला समाज
यादव समाज भवन
रेलवे का तर्क है कि स्टेशन पुनर्विकास योजना के विस्तार के लिए इन जमीनों की आवश्यकता है और नियमों के तहत सभी अवैध ढांचों को हटाया जाएगा।
संस्थाओं का विरोध: “3 किमी दूर की जमीन पर नोटिस क्यों?”
नोटिस मिलते ही संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने इसे जनसेवा पर हमला बताया है। अनुराग नारायण शिक्षा सेवा संस्थान के अध्यक्ष अखिलेश्वर सिंह ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि उनका संस्थान मुख्य स्टेशन पुनर्विकास क्षेत्र से लगभग 3 किलोमीटर दूर है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे प्रशासन स्पष्ट जानकारी देने के बजाय संस्थानों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
संस्थाओं का कहना है कि वे 1975 से सक्रिय हैं और यहाँ गरीब बच्चों की शिक्षा, सामुदायिक बैठकें और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। अचानक बेदखली से वर्षों की सामाजिक संरचना बिखर जाएगी।
वैकल्पिक समाधान की मांग और रेलवे का कड़ा रुख
जिला परिषद सदस्य कविता परमार ने बीच का रास्ता निकालने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि रेलवे विकास कार्य भी करे, लेकिन इन संस्थाओं को लीज पर जमीन देकर उनका अस्तित्व बचाए रखना चाहिए।
दूसरी ओर, रेलवे के इंजीनियर आरके वर्मा ने स्पष्ट किया है कि रेलवे की जमीन पर किसी भी प्रकार का अनाधिकृत कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विकास परियोजना में बाधा बनने वाले हर ढांचे को हटाया जाना अनिवार्य है।
बढ़ सकता है टकराव: रविवार को बुलाई गई बैठक
इस मुद्दे पर रणनीति तैयार करने के लिए सभी सामाजिक संगठनों ने रविवार शाम को एक संयुक्त बैठक बुलाई है। शहर में चर्चा है कि यदि रेलवे ने अपना रुख नरम नहीं किया, तो यह मामला एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

