उदित वाणी जमशेदपुर : जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र के लुआबसा निवासी 45 वर्षीय जुरू गोप की मौत के बाद टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) में शव रोकने का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने करीब 2 लाख रुपये का बकाया जमा होने तक शव देने से इनकार कर दिया था। बाद में भाजपा नेता विमल बैठा के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल ने मानवीय आधार पर बकाया राशि माफ कर दी।
छत से गिरने के बाद आईसीयू में चल रहा था इलाज
जानकारी के अनुसार, जुरू गोप पांच दिन पहले छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। परिजनों ने उन्हें तत्काल टीएमएच में भर्ती कराया, जहां आईसीयू और वेंटिलेटर पर उनका इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान परिवार आर्थिक संकट से जूझता रहा। परिजनों का कहना है कि इलाज के लिए घर और जेवर तक गिरवी रखने पड़े।
इलाज पर खर्च हुए साढ़े तीन लाख रुपये
मृतक के बेटे ने बताया कि इलाज में पहले ही करीब 3.5 लाख रुपये खर्च हो चुके थे। इसके बावजूद जुरू गोप की जान नहीं बच सकी और बुधवार को उनकी मौत हो गई। आरोप है कि मौत के बाद भी अस्पताल ने करीब 2 लाख रुपये बकाया बताते हुए भुगतान से पहले शव देने से मना कर दिया।
विमल बैठा के हस्तक्षेप से मिली राहत
घटना की जानकारी मिलने पर भाजपा नेता विमल बैठा तत्काल टीएमएच पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन से बातचीत की। उन्होंने परिवार की खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए मानवता के आधार पर बकाया माफ करने की मांग की। काफी बातचीत और हस्तक्षेप के बाद अस्पताल प्रबंधन ने 2 लाख रुपये का बकाया बिल माफ कर दिया, जिसके बाद परिजनों को शव सौंपा गया। देर शाम लुआबसा में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। मृतक के पुत्र ने कहा कि परिवार पूरी तरह टूट चुका था और अंतिम संस्कार तक के लिए पैसे नहीं बचे थे। उन्होंने कहा कि यदि विमल बैठा मदद के लिए नहीं आते तो शव ले जाना भी संभव नहीं हो पाता।
वहीं भाजपा नेता विमल बैठा ने कहा कि दुख की घड़ी में अस्पतालों को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पैसों के कारण किसी मृतक का शव रोकना अमानवीय है।
अस्पताल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि आपात और संवेदनशील परिस्थितियों में अस्पतालों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। इस मामले ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की बिलिंग और शव रिलीज नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


