
उदित वाणी,रांची: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने असम विधानसभा चुनाव में जोरदार इंट्री की। मुख्यमंत्री ने असम में चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत करते हुए कोकराझार ज़िले के गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र में जेएमएम प्रत्याशी फ्रेडरिक्सन हांसदा के पक्ष में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस जनसभा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक उपस्थित थे। अपने चुनावी भाषण में हेमन्त सोरेन ने झारखण्ड की वीर परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां के आदिवासियों ने आज़ादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कभी गुलामी स्वीकार नहीं की।
उन्होंने कहा कि अब झुकने का समय नहीं, बल्कि अधिकार लेने का समय है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि आदिवासी और वंचित समाज के अधिकारों को घर-घर तक पहुंचाने का अभियान है। चुनाव के समय अपनाए जाने वाले हथकंडों से सावधान रहने की अपील करते हुए उन्होंने सभी से अपने बच्चों को शिक्षित करने पर बल दिया। उन्होंने शिक्षा को आज की सबसे बड़ी ताकत बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि असम के चाय बागान में काम करने वाले लोगों का देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में अहम योगदान है। लेकिन यहां काम करने वाले लोगों को अबतक उनका हक अधिकार नहीं मिल पाया है। उन्हें वर्षों से सिर्फ आश्वासन दिया गया लेकिन वास्तविक अधिकार नहीं दिया गया। हम उस हक अधिकार के लिए आपके संघर्ष के साथ हैं।
भाजपा देने वाली नहीं, बल्कि लेने वाली पार्टी
हेमन्त सोरेन ने कहा कि ये लोग चुनाव के समय आपके के खातों में पांच सौ या हज़ार रुपये डालते हैं और चुनाव के बाद सिरिंज लगाकर खून निकाल लेते हैं। ये लोग देने वाले नहीं, बल्कि लेने वाले हैं। जब तक इनका पेट और जेब नहीं भरता, तब तक ये कुछ नहीं देते। चुनाव के समय ये लोग जाल डालने का काम करते हैं और मतलब पूरा होने के बाद ये अपना वादा भूल जाते हैं।
झारखण्ड जैसी शिक्षा व्यवस्था असम में भी करेंगे लागू
झारखण्ड की शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए हेमन्त सोरेन ने कहा कि आज झारखण्ड में निजी स्कूलों से निकालकर अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भर्ती करा रहे हैं। सरकारी स्कूल में मौजूद नौ हजार सीटों के लिए चालीस हजार बच्चों ने परीक्षा दी है। यह बेहतर शिक्षा व्यवस्था का परिणाम है। असम में भी हम ऐसी व्यवस्था लाना चाहते हैं।
संवैधानिक संस्थाओं का करते हैं दुरुपयोग
हेमन्त सोरेन ने आरोप लगाया कि कुछ लोग पैसे के बल पर संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग करते हैं और चुनाव के समय मंच से मीठी-मीठी बातें करते हैं। जबकि वे जमीनी सच्चाइयों से दूर रहते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, प्रोफेसर और पत्रकार बनाना ही वास्तविक सशक्तिकरण है। उन्होंने बताया कि झारखण्ड में आदिवासी युवाओं की उच्च शिक्षा का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन करने का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार की व्यवस्था असम में भी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि वंचित समाज को समान अवसर मिल सके।

