
उदित वाणी, जमशेदपुर: झारखंड के प्रसिद्ध दलमा वन्यजीव अभयारण्य (Dalma Wildlife Sanctuary) में इस वर्ष 27 अप्रैल को आयोजित होने वाला ‘दिसुआ सेंदरा’ पर्व ऐतिहासिक होने जा रहा है। यह उत्सव केवल पारंपरिक शिकार तक सीमित न रहकर आदिवासियों की न्यायिक और सांस्कृतिक संप्रभुता का प्रतीक बनेगा। इस दिन दलमा की तलहटी पर आदिवासियों की सर्वोच्च महापंचायत ‘लो बीर दोरबार’ का आयोजन होगा, जिसे आदिवासी समाज अपना ‘सुप्रीम कोर्ट’ मानता है।
1340 ईस्वी से जारी है परंपरा: ‘लो बीर दोरबार’ का महत्व
सदियों पुरानी इस परंपरा का शंखनाद दलमा राजा राकेश हेंब्रम के आवास पर विशेष पूजा-अर्चना के साथ हो चुका है। ‘लो बीर दोरबार’ आदिवासी स्वशासन व्यवस्था की वह सर्वोच्च न्याय प्रणाली है जहाँ देश परगना, शिक्षाविद और बुद्धिजीवी जुटते हैं। यहाँ कोल्हान प्रमंडल के अलावा ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी हजारों शिकारी और समाज के प्रबुद्ध जन शामिल होंगे। इस पंचायत में समाज के जटिल विवादों और सांस्कृतिक नीतियों पर मंथन कर जो निर्णय लिए जाते हैं, उन्हें अंतिम माना जाता है।
वन विभाग के दखल और ‘पर्यटन केंद्र’ के खिलाफ उठेगी आवाज
इस वर्ष की महापंचायत में वन विभाग और वनों के व्यवसायीकरण का मुद्दा गरमाएगा। आदिवासी समाज का आरोप है कि जंगलों को बचाने के बजाय उन्हें ‘पर्यटन केंद्र’ बनाया जा रहा है, जिससे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है। इसके कारण जानवर आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। समाज का स्पष्ट मानना है कि कंक्रीट के रिसॉर्ट्स का निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा है।
‘बीर सिंगराई’: केवल शिकार नहीं, सामाजिक पाठशाला है सेंदरा
सेंदरा समिति के अनुसार, सेंदरा का उद्देश्य केवल शिकार नहीं बल्कि वन्यजीवों का संरक्षण और दुर्लभ जड़ी-बूटियों की खोज है। इस दौरान ‘बीर सिंगराई’ जैसी सामाजिक पाठशाला का भी आयोजन होता है, जहाँ युवाओं को पारिवारिक जीवन और सामाजिक जिम्मेदारियों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
मुख्यमंत्री को सौंपेंगे मांग पत्र: प्रमुख मांगें
आदिवासी समाज अपनी धार्मिक स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा के लिए मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपेगा, जिसमें निम्नलिखित बिंदु प्रमुख होंगे:
दलमा क्षेत्र में कंक्रीट के रिसॉर्ट्स का निर्माण तुरंत बंद हो
पारंपरिक हथियारों को छीनने जैसी कार्रवाई पर रोक लगे
1980 के दशक की प्रभावी मालगुजारी व्यवस्था को बहाल किया जाए
पर्यटन से होने वाली आय का 25 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय सेंदरा समिति को दिया जाए
27 अप्रैल को होने वाली यह महापंचायत जल-जंगल-जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों को पुनर्जीवित करने का एक निर्णायक मंच साबित होगी।
(झारखंड सेंदरा पर्व 2026, Dalma Sendra Festival)

