उदित वाणी, नई दिल्ली: देशभर में तेजी से बढ़ते तापमान और गर्मी की चपेट में आमजन को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में आयुर्वेद गर्मियों में स्वस्थ रहने के लिए सात आसान और प्रभावी वेलनेस टिप्स के बारे में जानकारी देता है.
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, गर्मियों में पित्त दोष बढ़ जाता है, इसलिए शरीर को अंदर से ठंडक प्रदान करना और संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है. आयुर्वेद के अनुसार, गर्मी के मौसम में कुछ आसान उपायों को अपनाकर शारीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर स्वस्थ और तरोताजा रहा जा सकता है.
आयुर्वेद मानता है कि गर्मी के मौसम में शरीर और मन दोनों को ठंडा और संतुलित रखने से ही असली स्वास्थ्य लाभ मिलेगा. इन आयुर्वेदिक टिप्स को अपनी दिनचर्या में शामिल करके बिना किसी दवा के गर्मी का सामना आसानी से किया जा सकता है.
ठंडक देने वाले पेय पीएं: खीरा, बेल शरबत, नारियल पानी और छाछ, सत्तू जैसे प्राकृतिक पेय पदार्थ गर्मी में शरीर को अंदर से ठंडक देते हैं. ये न सिर्फ प्यास बुझाते हैं, बल्कि शरीर के तापमान को भी संतुलित रखते हैं.
दोपहर की तेज धूप से बचें : दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें. अगर जाना ही पड़े तो सिर को कपड़े या छाते से ढकें और पानी की बोतल साथ रखें.
तले-भुने भोजन से परहेज करें : गर्मियों में तैलीय, मसालेदार, तला-भुना और ज्यादा मीठा भोजन पित्त दोष बढ़ाता है. हल्का, सात्विक और ताजा भोजन ही लें.
गुलाब जल और चंदन का इस्तेमाल करें : गुलाब जल आंखों और त्वचा को ठंडक देता है. चंदन का लेप पसीने, जलन और चकत्तों से राहत दिलाता है.सुबह जल्दी उठें और हल्का व्यायाम करें : सूरज निकलने से पहले उठकर योगासन, प्राणायाम या हल्की सैर करें. इससे शरीर पूरे दिन एनर्जेटिक रहता है.
दोपहर व रात का भोजन हल्का रखें : दोपहर व रात के समय में भारी भोजन से बचें. फल, सलाद, दही और हल्का अनाज लें ताकि पाचन आसान रहे.मन को ठंडा रखें: ध्यान, गहरी सांस लेने के अभ्यास और शांत संगीत सुनें. मानसिक तनाव गर्मी को और बढ़ा देता है, इसलिए मन को शांत रखना जरूरी है.


