
उदित वाणी, चाईबासा: झारखंड का आदिवासी बहुल जिला पश्चिम सिंहभूम बाल संरक्षण की दिशा में एक नई इबारत लिख रहा है . ‘मिशन वात्सल्य’ योजना के तहत जिले ने पूरे राज्य में सर्वाधिक फोस्टर केयर (पोषित देखरेख) प्लेसमेंट सुनिश्चित कर प्रथम स्थान हासिल किया है . जिले के विभिन्न प्रखंडों में अब तक 21 बच्चों को संस्थागत देखरेख से निकाल कर सुरक्षित और स्नेहमयी परिवारों से जोड़ा गया है .
क्या है फोस्टर केयर? (What is Foster Care)
यह एक ऐसी अस्थायी व्यवस्था है जिसमें 6 से 18 वर्ष के उन बच्चों को, जो अपने माता-पिता (जेल, बीमारी या अन्य कारणों से अनुपलब्ध) के साथ नहीं रह सकते, जाँचे-परखे असंबंधित परिवारों के साथ रखा जाता है . चयन प्रक्रिया में बच्चे की भाषा, संस्कृति, धर्म और परंपरा का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि बच्चा सहज महसूस कर सके .
किन बच्चों को मिलती है मदद?
• जिनके माता-पिता जेल में हैं या लापता हैं .
• जिनके परिवार गंभीर मानसिक या शारीरिक बीमारी से ग्रस्त हैं .
• अनाथ, परित्यक्त या बेसहारा बच्चे जिनकी उम्र 6-18 वर्ष के बीच हो .
• बाल गृह में रहने वाले वे बच्चे जिन्हें गोद (अडॉप्शन) नहीं दिया जा सकता .
चुनौतियों को मात देकर मिली सफलता
सारंडा के घने जंगलों और 18 दुर्गम प्रखंडों वाले इस जिले में यह सफर आसान नहीं था . पलायन और जागरूकता की कमी जैसी चुनौतियों के बीच जिला बाल संरक्षण इकाई ने घर-घर जाकर और ग्राम सभाओं के माध्यम से सघन अभियान चलाया . परिणामस्वरूप, चाईबासा, मंझगाँव, मंझारी, जगन्नाथपुर, चक्रधरपुर और मनोहरपुर जैसे क्षेत्रों से कई परिवार स्वेच्छा से आगे आए हैं .
बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव
फोस्टर परिवारों में जाने के बाद बच्चों के व्यवहार और स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है:
• भावनात्मक सुरक्षा: बच्चों को पारिवारिक वातावरण और अपनत्व मिला है .
• बौद्धिक व सामाजिक विकास: बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास और सामाजिक मेल-जोल बढ़ा है .
• आत्मनिर्भरता: बच्चे अब खेलकूद, योग और शारीरिक गतिविधियों में भाग लेकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं .
कैसे जुड़ें इस मुहिम से?
चाईबासा के उपायुक्त चंदन कुमार ने कहा कि बच्चे समाज के भविष्य की नींव हैं . उन्होंने समुदाय से अपील की है कि बेसहारा बच्चों को नया घर देने के लिए आगे आएं . वर्तमान में 11 नए परिवारों के आवेदन प्राप्त हुए हैं . इच्छुक परिवार बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण कार्यालय या मिशन वात्सल्य पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं .

