
उदित वाणी, चांडिल:झारखंड के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक और उम्मीद भरी खबर है. पिछले 26 वर्षों से लंबित चांडिल जल विद्युत परियोजना अब परिचालन के बेहद करीब पहुंच गई है. यदि तकनीकी और प्राकृतिक स्थितियां अनुकूल रहीं, तो जून 2026 से इस परियोजना की पहली यूनिट से बिजली उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा.
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं और क्षमता
इस परियोजना को पीपीपी (PPP) मोड के तहत विकसित किया जा रहा है, जिसमें राज्य सरकार की महत्वपूर्ण भागीदारी है.
• कुल क्षमता: 8 मेगावाट (4-4 मेगावाट की दो अलग इकाइयां).
• लाभ: उत्पादन शुरू होने पर लगभग 70,000 घरों को सीधे बिजली की आपूर्ति की जा सकेगी.
• क्षेत्रीय प्रभाव: चांडिल और आसपास के इलाकों में बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी.
जल स्तर: उत्पादन के मार्ग में अंतिम चुनौती
परियोजना की सफलता अब पूरी तरह स्वर्णरेखा नदी के जल प्रबंधन पर टिकी है. टरबाइन चलाने के लिए आवश्यक मापदंड निम्नलिखित हैं:
• अनिवार्य जल स्तर: डैम में कम से कम 185 EL जल स्तर होना आवश्यक है.
• वर्तमान स्थिति: फिलहाल जल स्तर लगभग 180 EL के आसपास है.
• आवश्यकता: बिजली उत्पादन शुरू करने के लिए वर्तमान स्तर से कम से कम 5 मीटर अतिरिक्त पानी की जरूरत है.
मानसून से जगी उम्मीद और विभागीय समन्वय
जून के महीने में मानसून की दस्तक के साथ ही स्वर्णरेखा नदी के जल स्तर में वृद्धि की संभावना है. विभागीय विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के पानी से डैम का जल स्तर 185 EL तक पहुँच सकता है. हालांकि, इसके लिए सिंचाई विभाग और ऊर्जा विभाग के बीच बेहतर जल प्रबंधन और समन्वय अनिवार्य होगा.स्थानीय निवासियों के लिए यह महज एक बिजली परियोजना नहीं, बल्कि दशकों पुराना सपना है जो अब धरातल पर उतरने को तैयार है.

