
उदित वाणी, चाकुलिया: विकास की बाट जोह रहे ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी खराब सड़कें स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी बाधा बनी हुई हैं. ताजा मामला चाकुलिया प्रखंड के कालापाथर पंचायत का है, जहाँ बेंतझारिया गांव से मुख्य सड़क तक जाने वाला रास्ता इतना जर्जर हो चुका था कि आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस का वहाँ पहुंचना लगभग नामुमकिन था. ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या को देखते हुए मुखिया प्रतिनिधि ने पहल की और श्रमदान के जरिए मिसाल पेश की.
मरीजों की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
ग्रामीणों के अनुसार, रास्ते की खराब हालत के कारण किसी भी मरीज को समय पर अस्पताल पहुँचाना एक बड़ी चुनौती बन गया था. खराब सड़क के कारण एंबुलेंस चालक गांव के भीतर आने से कतराते थे, जिससे समय पर इलाज न मिलने का खतरा बना रहता था. इस कठिनाई को देखते हुए कालापाथर मुखिया प्रतिनिधि कृपा सिंधु सिंह ने तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने का निर्णय लिया.
ट्रैक्टर मरुम और श्रमदान से बदली सड़क की सूरत
मुखिया प्रतिनिधि ने केवल योजना का इंतजार नहीं किया, बल्कि तत्काल 15 से 16 ट्रैक्टर मरुम की व्यवस्था की. इसके बाद उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर खुद फावड़ा उठाया और श्रमदान के माध्यम से रास्ते की मरम्मत शुरू कर दी. कुछ ही घंटों की मेहनत के बाद रास्ते को इस लायक बना दिया गया कि अब एंबुलेंस बिना किसी रुकावट के गांव तक आ-जा सकेगी.
इन लोगों ने दिया अपना योगदान
इस पुनीत कार्य में पंचायत के कई जनप्रतिनिधियों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. श्रमदान करने वालों में मुख्य रूप से:
वार्ड पार्षद: रंजीत माण्डी
अन्य सहयोगी: बबलु मुर्मू, कालु माण्डी, लुसी टुडु, विमल माण्डी इसके अलावा गांव के दर्जनों लोगों ने इस मरम्मत कार्य में अपना पसीना बहाया ताकि आपातकाल में किसी की जान पर न बन आए.
ग्रामीणों ने जताई खुशी
सड़क की मरम्मत होने से बेंतझारिया गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और सरकार के भरोसे बैठने के बजाय मुखिया प्रतिनिधि की इस त्वरित पहल ने साबित कर दिया कि इच्छाशक्ति हो तो समस्याओं का समाधान मिलकर किया जा सकता है.

