उदित वाणी आदित्यपुर: सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर अंतर्गत मौजा-जमालपुर स्थित निर्माणाधीन आवासीय/व्यावसायिक परियोजना “द सैफायर” (The Sapphire) को लेकर भूमि विवाद लगातार गहराता जा रहा है- मामले को लेकर एक पक्ष ने बकायदा प्रेस वार्ता (Press Conference) का आयोजन कर बिल्डर और परियोजना पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं- शिकायतकर्ता पक्ष का सीधा आरोप है कि यह पूरी परियोजना विवादित जमीन पर खड़ी की जा रही है और इससे जुड़े कई महत्वपूर्ण मुकदमे वर्तमान में न्यायालय के समक्ष लंबित हैं-
3.97 एकड़ जमीन पर विवाद, बिना वैधानिक बंटवारे के रजिस्ट्री का दावा
प्रेस वार्ता के दौरान शिकायतकर्ता ने मीडिया के सामने दावा किया कि परियोजना के अंतर्गत आने वाली करीब 3.97 एकड़ जमीन सीधे तौर पर उनसे संबंधित है- उनका आरोप है कि इस पैतृक या हिस्सेदारी वाली जमीन का अब तक कोई भी वैधानिक और कानूनी बंटवारा (Legal Partition) नहीं हुआ है- इसके बावजूद, नियमों को ताक पर रखकर इस विवादित भूमि की रजिस्ट्री करा ली गई और धड़ल्ले से निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया है-
गलत जानकारी देकर नक्शा पास कराने और बैंक लोन पर उठाए सवाल
शिकायतकर्ता पक्ष ने केवल बिल्डर पर ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और वित्तीय संस्थानों पर भी सवाल खड़े किए हैं- उन्होंने आरोप लगाया कि:
बिल्डर द्वारा संबंधित विभागों को जमीन के स्वामित्व के संबंध में गलत और भ्रामक जानकारी देकर परियोजना का नक्शा पास कराया गया है-
मामले में पूरी तरह स्पष्टता न होने के बावजूद कई बैंक भी इस विवादित प्रोजेक्ट के लिए ग्राहकों को धड़ल्ले से गृह ऋण (Home Loan) उपलब्ध करा रहे हैं-
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया कि इस पूरी जमीन और प्रोजेक्ट को लेकर सिविल कोर्ट से लेकर झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) तक में कानूनी वाद और याचिकाएं फिलहाल लंबित हैं, जिन पर अंतिम फैसला आना अभी बाकी है-
ग्राहकों को चेतावनी: “दस्तावेजों की जांच किए बिना निवेश किया तो फंस सकती है पूंजी”
प्रेस वार्ता के अंत में शिकायतकर्ता ने आम जनता और संभावित घर खरीदारों (Buyers) के लिए एक महत्वपूर्ण अपील और चेतावनी जारी की- उन्होंने कहा कि ग्राहक “द सैफायर” परियोजना में किसी भी तरह का फ्लैट, दुकान या भूखंड खरीदने या निवेश करने से पहले जमीन के सभी मूल व कानूनी दस्तावेजों (Title Deeds & Legal Documents) की गहनता से जांच अवश्य कर लें- यदि ग्राहक बिना जांच-पड़ताल किए इस परियोजना में अपनी गाढ़ी कमाई लगाते हैं, तो भविष्य में कानूनी अड़चनों के कारण उनकी जमा पूंजी पूरी तरह फंस सकती है-


