
उदित वाणी, जमशेदपुर : जमशेदपुर से जुड़े गैंग्स्टर विक्रम शर्मा की हत्या की गुत्थी सुलझाने में उत्तराखंड पुलिस को उसके आईफोन से अहम सुराग मिलने की उम्मीद है. जांच एजेंसियों का मानना है कि फोन अनलॉक होते ही साजिश की कई परतें खुल सकती हैं. हालांकि, अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली के चलते अब तक फोन अनलॉक नहीं हो सका है, जिससे जांच की रफ्तार पर असर पड़ा है.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, तकनीकी टीम लगातार एप्पल के आईफोन को एक्सेस करने की कोशिश कर रही है. फोन में मौजूद कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मैसेज, सोशल मीडिया गतिविधियां और व्हाट्सएप चैट जांच के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि फोन खुलने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि हत्या से पहले विक्रम शर्मा किन-किन लोगों के संपर्क में था और किस स्तर पर साजिश रची गई.
झारखंड कनेक्शन की गहन पड़ताल
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि हत्या से कुछ समय पहले विक्रम शर्मा झारखंड गया था. पुलिस अब इस यात्रा की टाइमलाइन तैयार कर रही है -वह किन स्थानों पर गया, किन लोगों से मिला और उसके संपर्क में कौन-कौन था. संबंधित जिलों में सीसीटीवी फुटेज, होटल लॉगबुक और ट्रैवल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं.
देहरादून पुलिस आर्थिक पहलुओं की भी जांच कर रही है. अधिकारियों के मुताबिक, विक्रम शर्मा के बैंक खातों, लेन-देन और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से समीक्षा की जा रही है. बताया जा रहा है कि उसने अपने भाई के व्यवसाय में बड़ी रकम निवेश की थी. इसके अलावा, उसका करीबी शिष्य अखिलेश फिलहाल जेल में बंद है, जिससे जुड़े संभावित लिंक की भी जांच चल रही है.
पुलिस ने विक्रम शर्मा की पत्नी और भाई से लंबी पूछताछ की है. सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान पत्नी ने कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के नाम बताए हैं, जिन्हें अब जांच एजेंसियों की रडार पर रखा गया है. पुलिस इन नामों के आधार पर कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा का मिलान कर रही है.
पेशेवर अंदाज में अंजाम दी गई वारदात
प्रारंभिक जांच में हत्या को बेहद योजनाबद्ध और पेशेवर तरीके से अंजाम दिया जाना सामने आया है. पुलिस के अनुसार, तीन शूटर अलग-अलग माध्यमों से हरिद्वार पहुंचे. यहां उनकी आपस में मुलाकात हुई, जिसके बाद उन्होंने किराये पर स्कूटी और बाइक ली. जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि बाइक पर फर्जी नंबर प्लेट लगाई गई थी, ताकि पहचान छुपाई जा सके.
अधिकारियों के मुताबिक, शूटरों ने सिल्वर सिटी मॉल में विक्रम शर्मा की हत्या को अंजाम दिया. वारदात के बाद वे अलग-अलग रास्तों से हरिद्वार लौटे, बाइक वापस की और फिर ट्रेन व विमान के जरिए फरार हो गए. पुलिस को संदेह है कि शूटरों को हथियार गिरोह के अन्य सदस्यों ने उपलब्ध कराए थे.
सुपारी और नेटवर्क की जांच
पुलिस की जांच में यह संकेत भी मिले हैं कि हत्या सुपारी के तहत की गई. सूत्रों के अनुसार, शूटरों को मोटी रकम दिए जाने की बात सामने आ रही है. इस पहलू पर विशेष जांच दल और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं. पुलिस विभिन्न राज्यों में सक्रिय अपराधियों और गैंग नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है.
जांच एजेंसियों का दावा है कि शूटरों की पहचान कर ली गई है. उनके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है. पुलिस का कहना है कि जल्द ही गिरफ्तारी की दिशा में ठोस सफलता मिल सकती है.
पुलिस का बयान
प्रमेंद्र सिंह डोबाल, एसएसपी देहरादून ने बताया कि पुलिस और एसटीएफ की टीमें अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर रही हैं. उन्होंने कहा, “हम तकनीकी और फील्ड दोनों स्तर पर तेजी से काम कर रहे हैं. कई अहम सुराग हाथ लगे हैं. शूटरों और उनसे जुड़े नेटवर्क के काफी करीब पहुंच चुके हैं. उम्मीद है कि जल्द ही गिरफ्तारी होगी.”
तकनीकी जांच बनी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि आईफोन की सुरक्षा प्रणाली जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है. डिजिटल फॉरेंसिक टीम डेटा रिकवरी के हर संभव विकल्प पर काम कर रही है. पुलिस का कहना है कि फोन अनलॉक होते ही केस में निर्णायक प्रगति संभव है.
विक्रम शर्मा हत्याकांड में झारखंड कनेक्शन, आर्थिक लेन-देन और सुपारी एंगल -तीनों जांच के केंद्र में हैं. पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और मानवीय खुफिया इनपुट के आधार पर केस की कड़ियां जोड़ने में जुटी है. फिलहाल, सभी की नजरें उस आईफोन पर टिकी हैं, जो इस सनसनीखेज हत्याकांड की सच्चाई उजागर करने की कुंजी बन सकता है.

