उदित वाणी, नई दिल्ली: भारत सरकार घरेलू ऑटो इंडस्ट्री को बड़ी राहत देने के लिए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) नियमों में ढील देने की योजना बना रही है. एनडीटीवी प्रॉफिट की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार वर्ष 2027 से 2032 की अवधि के लिए निर्धारित कठोर उत्सर्जन लक्ष्यों को थोड़ा नरम कर सकती है.
CAFE नियम ऐसे मानक हैं, जिनके तहत किसी वाहन निर्माता कंपनी (OEM) द्वारा एक वित्त वर्ष में बेची गई सभी यात्री कारों की औसत ईंधन खपत और CO₂ उत्सर्जन का आकलन किया जाता है. इसका मकसद ईंधन की बचत, तेल आयात पर निर्भरता कम करना और प्रदूषण घटाना है.
चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे सख्त नियम
ऊर्जा मंत्रालय और ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) द्वारा तैयार किए गए संशोधित ड्राफ्ट में सरकार ने एक साथ कठोर लक्ष्य थोपने के बजाय ‘चरणबद्ध दृष्टिकोण’ अपनाया है. इस प्रस्ताव में अनुपालन का दायरा कम करने का प्रावधान किया गया है, जिससे भारी वाहनों को पहले मिलने वाला अतिरिक्त लाभ अब कम हो जाएगा. गौरतलब है कि कैफे 2027, भारत की फ्लीट-स्तरीय ईंधन अर्थव्यवस्था रोड मैप का तीसरा चरण है, जिसका उद्देश्य ऑटोमोबाइल सेक्टर को देश के जलवायु लक्ष्यों के साथ जोड़ना है.
उत्सर्जन लक्ष्यों में किया गया बदलाव
कैफे 2027 के नए ड्राफ्ट में सितंबर 2025 के पुराने ड्राफ्ट की तुलना में नियमों को काफी लचीला बनाया गया है. उत्सर्जन वक्र (Emission Curve) को एक नए ढलान सूत्र (Slope Formula) के साथ समायोजित किया गया है. इसे वित्त वर्ष 2028 में 0.00158 निर्धारित किया गया है, जो वित्त वर्ष 2032 तक घटकर 0.00131 हो जाएगा. इस बदलाव से पहले के प्रस्ताव की तुलना में ईंधन की खपत थोड़ी अधिक होने की अनुमति मिल सकेगी.
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के लिए ‘सुपर क्रेडिट’
ड्राफ्ट में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के लिए ‘सुपर क्रेडिट’ का प्रावधान शामिल है. इसके तहत फ्लीट-स्तर के उत्सर्जन की गणना करते समय एक इलेक्ट्रिक वाहन को कई वाहनों के बराबर गिना जा सकेगा. प्लग-इन हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल हाइब्रिड वाहनों को उच्च गुणक (Higher Multipliers) मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा, कार निर्माताओं के बीच ‘क्रेडिट ट्रेडिंग’ की भी अनुमति दी गई है, जिससे कंपनियों को नियमों का पालन करने में आसानी होगी.
जुर्माना और छोटे निर्माताओं को छूट
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि नियमों का पालन न करने पर बड़े निर्माताओं पर करोड़ों रुपये का भारी जुर्माना लग सकता है. हालांकि, छोटे पैमाने के निर्माताओं को बड़ी राहत दी गई है; प्रति वर्ष 1,000 से कम यूनिट का उत्पादन करने वाले विशिष्ट निर्माताओं को इन अनुपालन आवश्यकताओं से पूरी तरह छूट दी गई है.
किन वाहनों पर लागू होते CAFE नियम ?
भारत में CAFE नियम 3500 किलोग्राम से कम ग्रॉस व्हीकल वेट (GVW) वाली यात्री कारों पर लागू होते हैं. इसमें पेट्रोल, डीजल, CNG, LPG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारें शामिल हैं.
कैसे तय होता है अनुपालन?
यह नियम किसी एक कार मॉडल पर नहीं, बल्कि कंपनी के पूरे बेड़े (fleet) पर लागू होता है.
कंपनी की सभी कारों की बिक्री के आधार पर औसत निकाला जाता है.
हर मॉडल की लैब टेस्टिंग से तय फ्यूल एफिशिएंसी/CO₂ डेटा लिया जाता है.
फिर पूरी कंपनी का सालाना औसत तय लक्ष्य से मिलाया जाता है.
अगर औसत तय सीमा से ज्यादा है, तो कंपनी को तकनीक सुधारनी पड़ती है या कम उत्सर्जन वाले वाहन बढ़ाने पड़ते हैं.
भारत में CAFE के चरण
CAFE-I (2017–2022)
लक्ष्य: 130 ग्राम CO₂/किमी
CAFE-II (2022–2027)
लक्ष्य: 113 ग्राम CO₂/किमी
CAFE-III (प्रस्तावित: अप्रैल 2027 से)
मसौदा लक्ष्य: लगभग 91.7 ग्राम CO₂/किमी
CAFE-IV (प्रस्तावित: 2032 के बाद)
मसौदा लक्ष्य: लगभग 70 ग्राम CO₂/किमी


