
वित्त सह संसदीय कार्य मंत्री ने की पार्टी का अंदरूनी मामला बताकर टालने की कोशिश
उदित वाणी, रांची : झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पांचवे व आखिरी दिन सदन में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस विधायक ममता देवी द्वारा अपनी ही पार्टी के कोटे के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर घूसखोरी का गंभीर आरोप लगाये जाने का मामला उठाया. गुरूवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष ने सदन में दावा किया कि उनके पास ममता देवी और इरफान अंसारी के बीच हुई बातचीत का ऑडियो रिकॉर्डिंग [सीडी] मौजूद है. जिसमें ममता देवी ने मंत्री पर नर्सिंग कॉलेज के लिए एनओसी देने के एवज में 5 लाख रुपये कमीशन लेने के बावजूद काम नहीं करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर और खतरनाक स्थिति है.
दोनों सत्ता में बैठे एक ही पार्टी के लोग हैं. एक विधायक अपनी ही सरकार और पार्टी के मंत्री पर कमीशनखोरी का आरोप लगा रही है. मरांडी ने कहा कि दोनों के बीच हुए इस पूरे संवाद की सीडी की फॉरेंसिक जांच कराई जाए और यदि जरूरी हो तो मामले की सीबीआई से जांच कराई जाय. वहीं मामले में वित सह संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने इसे कांग्रेस पार्टी का आंतरिक मामला बताते हुए टालने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस पार्टी का अंदरूनी मामला है. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इसकी जांच की जा रही है और पार्टी मामले में कार्रवाई करेगी. सदन में इस पर चर्चा उचित नहीं है. वहीं इस मामले में विपक्षी भाजपा विधायकों ने सदन में हंगामा व नारेबाजी की. भाजपा की ओर से मामले में स्पीकर रबीन्द्रनाथ महतो से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की गई तथा स्पीकर को कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.
ममता देवी ने कांग्रेस कार्यालय में बैठक के दौरान खुलेआम इरफान पर लगायी हैं आरोप, वीडियो भी हुआ है वायरल
गौरतलब है कि कांग्रेस विधायक ममता देवी ने कुछ दिन पहले प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर खुलेआम आरोप लगाते हुए कहा था कि नर्सिंग कॉलेज की एनओसी देने के एवज में 5 लाख रुपये लेने के बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ाई. उन्होंने कहा कि इरफान विधायकों के काम नहीं करते हैं. ममता के इस आरोप का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है. विपक्ष इस पूरे प्रकरण को सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार का प्रमाण बता रहा है. जबकि कांग्रेस इसे पार्टी का आंतरिक विवाद बताकर टालने की कोशिश कर रही है.
गाइडलाइन व नॉर्म्स बदलने की वजह से केन्द्र से नहीं मिल रही राशि
इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष मरांडी ने छात्रवृत्ति के मुद्ये समेत अन्य कई मुद्यो पर भी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि सत्तापक्ष द्वारा बार-बार आरोप लगाया जा रहा है कि केन्द्र से राशि नहीं मिल रही है. उन्होंने कहा कि जबकि वास्तविकता यह है कि राज्य सरकार द्वारा जनता को भ्रमित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि केन्द्र द्वारा बर्ष 2022 को ही छात्रवृति के लिए एसटी-एससी व ओबीसी के लिए अलग-अलग मापदंड तय करते हुए गाइडलाइन बनाया गया है. परंतु राज्य सरकार द्वारा केन्द्र के गाइडलाइन को बदलकर अपना अलग गाइडलाइन बनाया गया है. ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा भी केन्द्र के नॉर्म्स को पूरा नहीं किया जा रहा है. जिसकी वजह से 15वें वित आयोग की दो-दो वित्तीय बर्ष की 1300-1300 करोड़ कुल 2600 करोड़ रूपये की राशि केन्द्र द्वारा रोक दी गई है. इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार के मंत्रियों को सलाह दी है कि अधिकारियों के साथ दिल्ली जाएं और केन्द्रीय मंत्रियों के साथ मुलाकात कर समाधान निकालें.

