
उदित वाणी, जमशेदपुर: परसुडीह मकदमपुर निवासी मोहम्मद हसन ने शहर की एक कथित प्लेसमेंट एजेंसी आइकॉनिक ओवरसीज पर मानव तस्करी का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने बताया कि कंपनी ने उन्हें कतर में अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर भेजा, लेकिन वहां मजदूरी करवाई गई. हसन का कहना है कि वह पिछले दस महीनों से कतर में फंसे थे और सोशल मीडिया पर मदद की गुहार लगाने के बाद ही वे भारत लौट सके.
हसन ने बताया कि आइकॉनिक ओवरसीज की मालिक तब्बसुम परवीन, मो. सकिल उर्फ प्याजु, मो. सिकंदर, मो. अफजल, मो. अमजद, मो. जावेद, युसूफ उर्फ पप्पू, मो. सद्दाम उर्फ लल्ला, मो. नौशाद और काजी मो. अकबर उर्फ बबलू ने उनसे कुल 70 हजार रुपये लिए थे—जिसमें 30 हजार रुपये ऑनलाइन और 40 हजार रुपये नकद दिए गए थे. कतर पहुंचने के बाद उन्हें बोरा ढोने जैसे मजदूरी के काम में लगा दिया गया.
हसन का कहना है कि जब उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा साझा की तो कंपनी के मालिक और उनके सहयोगियों ने उनके घर जाकर मारपीट और गाली-गलौज की. उन्होंने परसुडीह थाना और एसएसपी से न्याय की गुहार लगाई है. साथ ही, आरोप लगाया है कि आइकॉनिक ओवरसीज का दफ्तर सरकारी जमीन पर अवैध रूप से संचालित किया जा रहा है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

