
उदित वाणी, जमशेदपुर : जमशेदपुर में वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में काला झंडा दिखाने के मामले में बुधवार को विशेष न्यायालय (एमपी-एमएलए कोर्ट) ने बड़ा फैसला सुनाया. मामले में नामजद सभी आरोपियों को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया.
किन-किन नेताओं पर थे आरोप?
इस मामले में झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री दुलाल भुईयां, झारखंड आंदोलनकारी नेता हरमोहन महतो, पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र झा, बसपा के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी प्रणव महतो, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेता दिनेश महतो, साथ ही प्रभात मिश्रा और मनोज सिंह को आरोपी बनाया गया था.
इन सभी पर केस संख्या 111/2016 के अंतर्गत भारतीय दंड संहिता की धारा 143 (गैरकानूनी जमावड़ा), 341 (गलत तरीके से रोकना), 342 (ग़ैरकानूनी कैद), 353 (सरकारी कार्य में बाधा), 290 (सार्वजनिक उपद्रव) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप तय किए गए थे.
सबूतों के अभाव में सभी बरी
विशेष न्यायाधीश सुप्रिया रानी तिग्गा की अदालत ने सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त घोषित किया. अदालत का कहना था कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि घटना में इन नेताओं की कोई आपराधिक भूमिका थी.
नेताओं ने जताया आभार
फैसले के बाद सभी नेताओं ने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर शुरू से ही भरोसा था. उनका कहना था कि यह फैसला राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित झूठे मुकदमों के खिलाफ एक मिसाल है.

