उदित वाणी, जमशेदपुर : झारखंड के सरकारी स्कूलों को अब केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जाएगा. राज्य के शिक्षा विभाग और झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने इन्हें नवाचार के जीवंत केंद्रों यानी “इनक्यूबेटर्स ऑफ इनोवेशन” के रूप में विकसित करने की एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है. इसके तहत स्कूली बच्चों के भीतर छिपी वैज्ञानिक प्रतिभा को तराशने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं.
‘राष्ट्रीय आविष्कार अभियान’ के तहत मैथ और साइंस क्लब की शुरुआत
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के ‘राष्ट्रीय आविष्कार अभियान’ से जुड़कर राज्य के सरकारी स्कूलों में अब मैथ और साइंस क्लबों की शुरुआत की गई है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों में तर्कशक्ति और जिज्ञासा की भावना को प्रोत्साहित करना है. रांची में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम में इस योजना का औपचारिक शुभारंभ किया गया, जिसमें शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित 173 सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और ब्लॉक रिसोर्स पर्सन्स ने हिस्सा लिया.
‘एक्सपेरिमेंटल लर्निंग मॉडल’ पर आधारित होगी शिक्षा
यह नई व्यवस्था पारंपरिक रटंत प्रणाली के स्थान पर ‘एक्सपेरिमेंटल लर्निंग मॉडल’ यानी अनुभव आधारित शिक्षा पर जोर देती है. इन क्लबों के माध्यम से छात्र विज्ञान और गणित जैसे विषयों को केवल पढ़ेंगे नहीं, बल्कि व्यावहारिक प्रयोगों और गतिविधियों के जरिए उन्हें समझेंगे. कार्यक्रम के दौरान इन क्लबों के संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी जारी की गई, जो शिक्षकों को रोचक गतिविधियों के माध्यम से जटिल सिद्धांतों को सरल बनाने में मदद करेगी.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का लक्ष्य
माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद और अन्य अधिकारियों ने बल दिया है कि यह कदम राज्य के सुदूर क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चों में समस्या समाधान के कौशल और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में मील का पत्थर साबित होगा. आने वाले समय में इस पहल को पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है.
भविष्य की नई दृष्टि और साझा प्रयास
जब बच्चे स्वयं मॉडल बनाएंगे और विज्ञान के चमत्कारों को देखेंगे, तो उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा. राज्य सरकार और निजी संस्थाओं के इस साझा प्रयास से झारखंड के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है, जहाँ अब आने वाली पीढ़ी रटने के बजाय खोजने पर ध्यान केंद्रित करेगी.


